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राम का राज्याभिषेक :रामकथा/रामायण | भाग-12

राम का राज्याभिषेक विभीषण चाहते थे कि राम कुछ दिन लंका में रुक जाएँ। नयी लंका में। उनकी लंका में। उन्होंने अपनी इच्छा राम को बताई। उसका कारण भी। “मैं चाहता हूँ कि आप कुछ दिन यहाँ विश्राम कर लें। युद्ध की थकान उतर जाएगी। वैसे इसमें मेरा स्वार्थ भी …

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लंका विजय : रामकथा/रामायण | भाग-11

लंका कूच की तैयारियाँ रातभर चलती रहीं। सभी तत्पर। सभी उद्यत। सुबह कूच से पहले सुग्रीव ने वानरों को संबोध्ति किया। युद्ध के बारे में। कहा, फ्युद्ध भयानक होगा। इसमें केवल वही सैनिक जाएँगे जो शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हों। जो दुर्बल हैं, यहीं रुक जाएँ।” वानर सेना …

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लंका में हनुमान : रामकथा/रामायण | भाग-10

हनुमान उठे। अँगड़ाई ली। झुककर धरती को छुआ। और एक ही छलाँग में महेंद्र पर्वत पर जा खड़े हुए। जामवंत सफल हो गए थे। हनुमान को उनकी शक्ति की याद दिलाने में। पर्वत शिखर पर खड़े हनुमान ने विराट समुद्र की ओर देखा। उनकी आँखों में चुनौती का भाव नहीं …

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राम और सुग्रीव : रामकथा/रामायन | भाग-9

राम और लक्ष्मण का अगला पड़ाव ऋष्यमूक पर्वत था। सुग्रीव वहीं रहते थे। कबंध् और शबरी की बात दोनों भाइयों को याद थी। दोनों ने सुग्रीव से मिलने की सलाह दी थी। कहा था कि वे सीता की खोज में सहायक होंगे। दोनों राजकुमार शीघ्रता से वहाँ पहुँचना चाहते थे। …

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सोने का हिरण : रामकथा/रामायण | भाग-7

राम को कुटी से निकलते देखकर मायावी हिरण कुलाचें भरने लगा। राम को बहुत छकाया। झाडि़यों में लुकता-छिपता-भागता वह राम को कुटी से बहुत दूर ले गया। राम जब भी उसे पकड़ने का प्रयास करते, वह भागकर और दूर चला जाता। हिरण चालाक था। वह इतनी दूर कभी नहीं जाता …

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दंडक वन में दस वर्ष : रामकथा/रामायण भाग – 6

दंडक वन में दस वर्ष भरत अयोध्या लौट चुके थे। नगरवासी भी। सेना धूल उड़ाती हुई वापस जा चुकी थी। कोलाहल थम गया था। दो दिन बाद चित्रकूट की परिचित शांति लौट आई थी। पक्षियों की चहचहाहट फिर सुनाई पड़ने लगी थी। हिरण कुलाचें भरते हुए बाहर निकल आए थे। …

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चित्रकूट में भरत : रामायण/रामकथा : भाग : 5

चित्रकूट में भरत केकय राज्य में थे। अपनी ननिहाल में। अयोध्या की घटनाओं से सर्वथा अनभिज्ञ। लेकिन वे चिंतित थे। उन्होंने एक सपना देखा था। पर उसका अर्थ पूरी तरह नहीं समझ पा रहे थे। संगी-साथियों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं नहीं जानता कि उसका अर्थ क्या है? …

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राम का वन – गमन : रामकथा भाग – 4

राम का वन-गमन कोपभवन के घटनाक्रम की जानकारी बाहर किसी को नहीं थी। यद्यपि सभी सारी रात जागे थे। कैकेयी अपनी शिद पर अड़ी हुईं। राजा दशरथ उन्हें समझाते हुए। नगरवासी राज्याभिषेक की तैयारी करते हुए। गुरु वशिष्ठ की आँखों में भी नींद नहीं थी। आखिर, राम का अभिषेक था! …

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दो वरदान : रामकथा | भाग – 3

राजा दशरथ के मन में अब एक ही इच्छा बची थी। राम का राज्याभिषेक। उन्हें युवराज का पद देना। अयोध्या लौटने के बाद से ही उन्होंने राम को राज-काज में शामिल करना शुरू कर दिया था। राम यह शिम्मेदारी अच्छी तरह निभा रहे थे। उनकी विनम्रता, विद्वत्ता और पराक्रम का …

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जंगल और जनकपुर : रामकथा/रामायण | भाग-2

राजमहल से निकलकर महर्षि विश्वामित्र सरयू नदी की ओर बढ़े। दोनों राजकुमार साथ थे। उन्हें नदी पार करनी थी। आश्रम पहुँचने के लिए। विश्वामित्र ने अयोध्या के निकट नदी पार नहीं की। दूर तक सरयू के किनारे-किनारे चलते रहे। दक्षिणी तट पर। उसी तट पर, जिस पर अयोध्या नगरी थी। …

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