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दुश्मन का दुश्मन अपना दोस्त होता है : हिंदी कहानी

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Motivational Hindi Story, Inspirational Hindi Kahani 

हिंदी कहानी जो बदल देगी आप की जिंदगी 

सन् 1939 में द्वितीय विश्व-युद्ध छिड़ चुका था। हिटलर ने चेकोस्लोवाकिया, पोलैंड और फ्रांस समेत सारेयूरोप को अपने कब्जे में ले लिया था। ब्रिटेन पर भी खतरा मंडरा रहा था। सर विंस्टन चर्चिल ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद का कार्यभार संभाला। उन्होंने अपने देश की सैन्य शक्ति को सुदृढ़ बनाया।

अपनी सैन्य शक्ति को सुदृढ़ बनाने के लिए चर्चिल को भारत की सहायता की आवश्यकता थी। भारतीय राष्ट्रवादियों को अपने लोगों के लिए ज्यादा अधिकारों की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता दिखाई दे रहा था। उन्होंने ब्रिटिश सरकार से भारत की सैन्य-शक्ति के संचालन में भारतीयों की भागीदारी के लिए अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि ‘वायसरॉय एक्ज़िक्यूटिव काउंसिल’ के एक भारतीय सदस्य को युद्ध-मामलों की जिम्मेदारी सौंप दी जाए। परंतु ब्रिटेन ने उनके इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

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उस समय तक सुभाषचंद्र बोस कोलकाता स्थित अपने घर में से नजरबंदी से बचकर भाग चुके थे। उन्होंने एक पठान का वेश धारण करके चीन, रूस तथा यूरोप का दौरा किया। यूरोप में उनकी मुलाकात हिटलर से हुई। बाद में उन्हें जापान में रह रहे एक अन्य राष्ट्रवादी रास बिहारी बोस ने अपने यहां आमंत्रित किया तथा युद्ध-बंदियों को संगठित करने का सुझाव दिया। जापान ने उनके इस कार्य में हर संभव सहायता प्रदान करने का

वादा किया।

सुभाषचंद्र बोस ने जापान द्वारा सहायता प्रदान करने का कारण नहीं पूछा। जापान तब ‘अक्ष’ देशों (ऐक्सिस पावर) के समूह का एक सदस्य था। यूरोप तथा अफ्रीका में स्थित मित्र देशों से जर्मनी तथा इटली युद्ध कर रहे थे। जापान ने एशिया महाद्वीप में अपना मोर्चा बांधा। इस प्रकार, ब्रिटेन का दुश्मन होने के कारण जापान ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लड़ाई में भारत का साथ दिया।

सुभाषचंद्र बोस ने जापान का निमंत्रण स्वीकार कर लिया। उन्होंने ‘आजाद हिंद फौज’ की स्थापना की। इस संगठन के सैनिकों ने जापानी सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध में उनका साथ दिया। इस प्रकार सुभाषचंद्र बोस ‘नेताजी’ के नाम से अमर हो गए।

शिक्षा : इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि आपातकाल में दुश्मन का दुश्मन भी अपना दोस्त बन जाता हैं/

 

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