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कैसे पाए सफलता Inspirational Hindi Story of Success

hindi storyदोस्तों एक बहुत बहुत बहुत ही प्रेरणादायक हिंदी कहानी में आपके साथ Share कर रहा हु. मेरे हिसाब से यह एक Life Changing Hindi Story है.

How to Get Success in Hindi via Hindi Story

इस कहानी को पढने के बाद आप पता चलेगा की जिंदगी में सफल होने के लिए क्या आवश्यक है.

A Very Very Motivational Hindi Story

A little knowledge is a dangerous thing

रविवार का एक सुहावना दिन था। नौ वर्षीय बालक रोहित ने दोपहर के भोजन के बाद घर के काम-काज में अपनी मां का हाथ बंटाया। यह देखकर रोहित की मां ने रोहित की पीठ थपथपाई तथा खुश होकर दीर्घायु होने का आशीर्वाद दिया और कहा, “बड़े होकर तुम भी अपने पिताजी की तरह घर के छोटे-मोटे कार्यों में अपना सहयोग दे सकते हो। काश! तुम्हारे पिताजी यहां होते। परंतु वे तो अधिकतर बाहर की यात्रा पर ही रहते हैं। बाथरूम का नल टपक रहा है। नल-मिस्त्री कई बार कहने पर भी ऐसे छोटे-मोटे कार्यों के लिए घर पर नहीं आता।’

इस पर रोहित ने तुरंत कहा, “यह कार्य मैं कर सकता हूं, मम्मी!” उसकी मां ने ना में उत्तर दिया तथा सोने के लिए शयन-कक्ष में चली गई।

रोहित ने अपने-आप से कहा, “नल की मरम्मत करना तो एक आसान-सा कार्य होना चाहिए। मैंने अपने पिताजी को इसकी मरम्मत करते हुए कई बार देखा है।’ वह मरम्मत की प्रक्रिया को याद करने लगा-रिंच को उठाओ। उसे नल की चूड़ी पर कस लो तथा नल को खोल लो। फिर वाशर को बदल लो और फिर नल को वापस कसकर उसी जगह पर फिट कर दी।

उसे यह कार्य बहुत ही आसान लग रहा था। फिर वह दबे-पांव पीछे के बरामदे में रखे शेल्फ तक गया और उसमें रखे टूल-बॉक्स को लेकर बाथरूम की ओर दौड़ पड़ा। नल से पानी टपक रहा था। रोहित ने झट से रिंच निकाला। उसे उसने नल में फिट किया तथा अपनी पूरी शक्ति से उसे घुमाने की कोशिश की, लेकिन वह सफल न हो सका। फिर वह सोचने लगा कि इस स्थिति में उसके पिताजी क्या करते। तब उसे याद

आया कि उसके पिताजी ऐसी स्थिति में रिंच के दूसरे छोर पर एक भारी ईंट से चोट मारते। रोहित ने भी ऐसा ही किया। दुर्भाग्यवश ऐसा करने से ईंट से उसके अंगूठे पर चोट लग गई। वह दर्द से कराहने लगा। उसने अपने-आप को संभाला तथा सोचने लगा कि यह कार्य तो मुझे करना ही है ताकि मेरी मां खुश हो जाए। उसने फिर से रिंच पर चोट मारी। इस बार वह सफल रहा। नल खुल गया तथा पानी बाहर निकलकर बहने लगा। रोहित पूरा गीला हो गया, पर उसने इसकी परवाह नहीं की, लेकिन रोहित को तब जोर का झटका लगा जब बहते पानी के वेग से नल की टूटी पहले हवा में उछल कर सामने की दीवार से टकराई और फिर लौटकर उसकी नाक में जोर से जा लगी, जिससे उसकी नाक पर चोट लग गई। इस दौरान टूटी जमीन पर गिर गई तथा पानी के साथ बहकर नाली में चली गई।

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रोहित इधर-उधर नजर घुमाकर टूटी को ढूंढ़ने लगा। इस बीच पानी का स्तर बढ़ने लगा। उसने जोर लगाकर नाली का ढक्कन खोलने का प्रयास किया, लेकिन वह ऐसा कर न सका। पूरे बाथरूम में पानी भर चुका था। शीघ्र ही उसके पैर घुटने से नीचे तक पानी में डूब चुके थे। अब वह सोच नहीं पा रहा था कि क्या करे, क्या ना करे। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। फिर उसके दिमाग में एक तरकीब आई। वह नाली का मुंह खोलने के लिए पेंचकस के प्रयोग के बारे में सोचने लगा। ठीक इसी समय उसकी मां दौड़ती हुई आई और उसे जोर से डॉट कर पूछा कि वह यह क्या कर बैठा! उसकी मां ने रोहित को कस कर पकड़ा और घसीटकर बाहर की ओर ले गई और कहा, “तुम्हें इस काम के बारे में क्या जानकारी है ?”

रोहित ने रुआंसे स्वर में कहा, “लेकिन मां, मैंने पिताजी को कई बार ऐसा करते हुए देखा है।’ उसकी मां ने कहा, “तो क्या हुआ? तुम्हारा ज्ञान तो अधूरा है।’ रोहित की मां ने सबसे पहले मेन वाल्व को बंद किया। फिर किसी तरह से पानी की निकासी में हो रही रुकावट को दूर किया। इस तरह सारा पानी नाली में बह गया।

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रोहित की मां ने उसे डांटते हुए कहा, “देखो, तुमने यह क्या उलटा-पुलटा कर दिया।’ फिर वह उसकी चोटिल नाक तथा अंगूठे को देखकर क्रोधित हो गई तथा उसे डांटते हुए कहा कि उसकी वजह से बाथरूम एक तालाब में तब्दील हो गया था। वह उसको कमरे में ले गई तथा उसके चोटग्रस्त शरीर की मरहम-पट्टी की और साथ ही एक बात को हमेशा याद रखने की हिदायत दी कि किसी चीज का कम ज्ञान होना खतरनाक साबित हो सकता है। इस बात को सदैव याद रखना।’

शिक्षा : इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए किसी काय-विशेष की अच्छी जानकारी होना अत्यंत आवश्यक हैं/ अल्पज्ञ व्यक्ति हमेशा खुद को और दूसरों को हानि पहुंचाता हैं/ इसीलिए तो कहा गया है कि-‘नीस हकीम खतरा-ए-जान’.

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