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कानून सबके लिए बराबर होता है Hindi Motivational Story

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Motivational Hindi Story

प्रेरणादायक हिंदी कहानियों का संग्रह 

शहंशाह जहांगीर ने अपने महल के प्रवेश-द्वार पर एक घंटा लगवा दिया था और पूरे नगर में घोषणाकरवा दी थी कि यदि किसी को किसी भी प्रकार की कोई शिकायत हो तो वह महल के प्रवेश-द्वार पर लगे घंटे को बजा सकता है। शहंशाह उनकी पुकार सुनेंगे और न्याय करेंगे।

यह खबर नगर में अच्छी तरह प्रचारित हो गई, कई लोग अपनी शिकायतें लेकर शहंशाह के दरबार में जाने लगे।

Hindi Story 

एक दिन शहंशाह जहांगीर की पत्नी नूरजहां धनुर्विद्या का अभ्यास कर रही थी। उसने कुछ चुने हुए निशानों पर अपने तीर चलाए। लौटने से पहले उसने एक तीर हवा में चलाते हुए नदी की तरफ फेंका जो वहीं कहीं नज़दीक जाकर गिरा। फिर वह अपने घर की ओर लौट गई।

कुछ देर पश्चात् किसी ने दरबार का घंटा बजाया। दरबार के पहरेदार ने एक धोबन को देखा जो सिसक-सिसक कर रो रही थी। उसके हाथ में खून से सना हुआ एक तीर था तथा पास में एक मनुष्य का मृत शरीर पड़ा था। वह न्याय की गुहार लगाने लगी। पहरेदार उसे शहंशाह के पास ले गया। उस महिला ने झुककर शहंशाह को सलाम किया। फिर उसने वह तीर नीचे जमीन पर बिछे कालीन पर रखा तथा अपनी सिसकियों के बीच कहा, “हुजूर !….किसी ने….मेरे पति को….इस तीर से मार डाला….अब मेरी….और मेरे बच्चों की….परवरिश….कौन करेगा ?’

शहंशाह ने वह तीर उठाया। उसमें शाही मुहर लगी हुई थी। महल के ही किसी व्यक्ति ने इस दुखद घटना को अंजाम दिया था। शहंशाह ने पहरेदार को आदेश दिया कि वह पता लगाए कि इस घटना वाले दिन कौन धनुर्विद्या का अभ्यास कर रहा था। पहरेदार तुरंत गया और थोड़ी ही देर बाद वापस लौट आया। वह जवाब देने में हिचकिचाने लगा। शहंशाह ने उससे जोर देकर पूछा तो पहरेदार ने बड़े ही धीमे स्वर में नूरजहां का नाम लिया।

इस पर शहंशाह ने नूरजहां को बुलवाने का आदेश भेजा। शीघ्र ही नूरजहां शहंशाह के समक्ष उपस्थित हुई। शहंशाह ने अपने कमरबंद में से एक छुरा निकाला तथा उस दुखी महिला के सामने रख दिया। तत्पश्चात् शहंशाह ने उस महिला से कहा, “तुम महारानी की वजह से विधवा हुई हो। तुम मुझे इस छुरे से मार दो। इससे तुम्हें न्याय अवश्य ही मिल जाएगा।’ यह सुनकर वह महिला झेंप गई और ऐसा करने में अपनी असमर्थता जताई। फिर शहंशाह ने उस महिला को राजकीय कोष में से आर्थिक सहायता प्रदान की। उसने शहंशाह का धन्यवाद किया और महल से चली गई।

इस घटना के उपरांत नूरजहां ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए शहंशाह से कहा, “आपने तो एक भयंकर खतरा मोल ले लिया था। अगर वह महिला आपके आदेश का पालन करती तो कितना बड़ा अनर्थ होता!’

इस पर शहंशाह ने कहा, “मैं चाहे मर जाता परंतु उस महिला के साथ न्याय तो होता। कानून की नज़र में सब बराबर हैं। कृपया इस बात का भविष्य में अवश्य ध्यान रखना।’

शिक्षा : इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि कानून की नज़रों में कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता/ उसकी नज़रों में तो सभी बराबर होते है.

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