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सब्जी उगाने के तरीके और उनसे होने वाले लाभ

sabji ugane ke tarike or unke labhसब्जियां/सब्जियाँ उगाने के विभिन्न तरीके तथा उनसे होने वाले लाभ
कैसे और किसलिए उगाते हैं हम सब्जियां? इन्हें उगाने के तरीके क्या हो सकते हैं? किन बातों पर निर्भर करते हैं सब्जियों की खेती के प्रकार? इस प्रकार के प्रश्न हमारे दिमाग में कॉंधना एक साधारण-सी बात है। यदि इनका हल भी सरल तथा वैज्ञानिक मिल जाए, तब बात आसानी से दिल में उतर जाती है। इसके लिए निम्नलिखित चार आधार सामने आते हैं
(i) हमारे पास खेती के साधन कैसे हैं? (ii) हम अपने खेत और खेती, दोनों का प्रबंध किस तरह कर सकते हैं? (iii) इस सारे काम को सरेअंजाम देने के लिए हमारी व्यवस्था कैसी हो? (iv) क्या खेती करने के बाद हमारे पास उचित विपणन सुविधा भी है
अथवा नहीं? यही चार आधार हैं सब्जी की खेती करने के। इन्हें ध्यान में रखकर हम सब्जी की खेती को मुख्यतः दो श्रेणियों में बांट सकते हैं- –
1. अपनी आवश्यकता के लिए, किचन-गार्डन में की जाने वाली खेती। 2. रोजी-रोटी अर्जित करने के लिए व्यावसायिक खेती। इन दो मुख्य श्रेणियों के अतिरिक्त भी खेती करने की अन्य आवश्यकता हो सकती है, जिससे हम पैसा कमा सकते हैं। इसके लिए भी यदि उचित प्रबंध हो जाए, तो व्यक्ति अच्छा लाभ कमा सकता है। यह साधनों के अतिरिक्त व्यक्ति की निजी दक्षता पर भी निर्भर करता है।
● यदि सरोवर-तालाब आदि उपलब्ध हो तो इनमें भी सब्जियां उगाई जा सकती हैं। जिनसे अच्छी पैदावार हो सकती है। ० कुछ व्यक्ति अपने खेतों से उत्पन्न सब्जी को सब्जी के रूप में न बेचकर स्टोर करते है.
● एक और प्रकार है सब्जी उत्पादकों का। वे केवल परिरक्षण एवं संसाधन के लिए ही सब्जी की खेती करते हैं।
● उचित मैौसम में तो सब सब्जी उगा लेते हैं, मगर जो बेमौसम में सब्जियां उगाते हैं, वे भी अच्छा आर्थिक लाभ कमा लेते हैं।
अब हम इन सब पर अलग-अलग से विचार करते हैं।

दोस्तों इस भाग में इतना ही अगले भाग में बात करते है सब्जियाँ की

Sabjiyan Ugane Ke Vibhinn Tarike Tatha Unase Hone Vale Labh

Kaise Aur Kislea Ugate Hain Hum Sabjiyan? Inhen Ugane Ke Tarike Kya Ho Sakte Hain? Kin Baaton Par Nirbhar Karte Hain Sabjiyon Ki Kheti Ke Prakar? Is Prakar Ke Prashn Humare Dimag Me Kondhana Ek Sadharan-Si Baat Hai. Yadi Inaka Hal Bhi Sirl Tatha Vaigyanik Mil Jae, Tab Baat Aasani Se Dil Me Utar Jati Hai. Iske Lea Nimnlikhit Char Aadhar Samane Aate Hain

(I) Humare Pass Kheti Ke Sadhan Kaise Hain? (Ii) Hum Apne Khet Aur Kheti, Dono Kaa Prabndh Kis Tarh Kar Sakte Hain? (Iii) Is Sare Kaam Ko Sireanjam Dene Ke Lea Humari Vyavstha Kaisi Ho? (Iv) Kya Kheti Karne Ke Bad Humare Pass Uchit Vipnan Suvidha Bhi Hai

Athava Nahin? Yahi Char Aadhar Hain Sabji Ki Kheti Karne Ke. Inhen Dhyan Me Rakhkar Hum Sabji Ki Kheti Ko Mukhayatः Do Shreniyon Me Banta Sakte Hain- –

  1. Apni Aavashykata Ke Lea, Kichan-Gardan Me Ki Jane Vali Kheti. 2. Everydayi-Roti Arjit Karne Ke Lea Vyavasayik Kheti. In Do Mukhay Shreniyon Ke Atirikt Bhi Kheti Karne Ki Any Aavashykata Ho Sakti Hai, Jisse Hum Paisa Kama Sakte Hain. Iske Lea Bhi Yadi Uchit Prabndh Ho Jae, To Vyakti Accha Labh Kama Skata Hai. Yah Sadhanon Ke Atirikt Vyakti Ki Niji Dakshata Par Bhi Nirbhar Karta Hai.
  • Yadi Sirovar-Talab Aadi Upalbdh Ho To Inamen Bhi Sabjiyan Ugai Ja Sakti Hain. Jinase Acchi Paidavar Ho Sakti Hai. ० Kuch Vyakti Apne Kheton Se Utpann Sabji Ko Sabji Ke Rup Me N Bechkar, Inahe store bhi karte hai.

 

  • Ek Aur Prakar Hai Sabji Utpaadakon Kaa. Ve Keval Parirakshan Avm Snsadhan Ke Lea Hi Sabji Ki Kheti Karte Hain.
  • Uchit Maiausam Me To Sab Sabji Uga Lete Hain, Mugr Jo Bemausam Me Sabjiyan Ugate Hain, Ve Bhi Accha Aarthik Labh Kama Lete Hain.

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