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इंग्लिश बोलना सीखें | आप इंग्लिश क्यों नहीं सिख पायें ?

अंग्रेजी सीखने के आसान तरीके

Engilsh Kaise Sikhe Angreji Bole

कैसे सीखे इंग्लिश बोलना | How to learn Spoken English

अंग्रेजी बोलना कैसे सीखें?

तेजी से बदलते हुए परिवेश में अंग्रेजी भाषा हमारे दैनिक वार्तालाप का अभिन्न अंग बन चुकी है। अंग्रेजी में प्रभावशाली तरीके से बातचीत करने की दक्षता व्यक्ति की योग्यता एवं प्रतिष्ठा की पहचान मानी जाने लगी है। चाहे आप विद्यार्थी हों या किसी भी प्रतियोगी परीक्षा के प्रत्याशी, आप व्यापारी हैं या किसी भी व्यवसाय (प्रंफेशन) में, जीवन के सभी क्षेत्रों में अंग्रेजी भाषा का विशिष्ट महत्व है एवं आपके उद्देश्य प्राप्ति में यह भाषा अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होगी। यही कारण है कि आज अधिकांश लोगों की, विशेषकर युवाओं की, यह हार्दिक अभिलाषा है कि उन्हें धाराप्रवाह रूप से शुद्ध अंग्रेजी बोलना आ जाये, दूसरों द्वारा अंग्रेजी में कही गई बातों को वे आसानी से समझ सकें तथा उन्हें अच्छी अंग्रेजी बोलने व लिखने में दक्षता प्राप्त हो जाये।

इंग्लिश: अंग्रेजी कैसे सीखे

लोगों की इस लालसा को देखते हुए आज सभी शहरों-कस्बों के गली-मोहल्ले में अनेक कोचिंग संस्थान खुल गये हैं। बाजार में अनेक पुस्तकें उपलब्ध हो गई हैं जो मात्र कुछ घंटों या कुछ दिनों में आपको धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलना सिखाने का दावा करते हैं। लेकिन दोस्तो! आपको यह तथ्य भलीभांति समझ लेना चाहिए कि अंग्रेजी भाषा पर पूर्ण अधिकार प्राप्त करने हेतु कोई लघु रीति (shortcut) नहीं है। आप स्वयं ही उचित पद्धति से परिश्रम कर इस भाषा की सीख सकते हैं।

आइये, अब हम इस भाषा को सीखने हेतु कुछ सही तरीकों का अध्ययन करते हैं, साथ ही कुछ ऐसी गलतफहमियों को दूर करते हैं, जो इस भाषा के सीखने में सबसे बड़ी बाधायें हैं।

क्या 90 घण्टों में अंग्रेजी बोलना सीख सकते हैं ?

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यह प्रश्न वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि अधिकांश कोचिंग संस्थान तथा बाजार में उपलब्ध अनेक पुस्तकें यह प्रचार करती हैं कि वे 90 घंटों या कुछ गिने चुने घंटों या दिनों में आपको फर्राटेदार अंग्रेजी बोलना सिखा देंगे। यह एक भ्रामक प्रचार है। अंग्रेजी विश्व की सर्वाधिक समृद्ध भाषा है। इसके सम्बन्ध में यह दावा करना या यह मान लेना कि मात्र कुछ घंटों या कुछ दिनों में धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलना सीखा जा सकता है, बिल्कुल गलत एवं भ्रामक है। धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलना सीखना या उस पर पूर्ण अधिकार प्राप्त करना कोई जादू का खेल या हाथ की सफाई नहीं है और न ही वर्तमान में कोई शिक्षक सतयुग जैसे ऋषि-मुनि-ज्ञानी की तरह हैं जिनके कह देने मात्र से आपको यह विद्या प्राप्त हो जाये। अंग्रेजी भाषा सीखने के इच्छुक व्यक्तियों को किसी गलतफहमी में न रहकर यह अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए कि अंग्रेजी सीखना तो अथक प्रयास द्वारा ही प्राप्त की जाने वाली कला (विधा) है। अत: किसी भ्रामक कल्पना में रहने के बजाय उचित पद्धति से लगन, निष्ठा एवं ईमानदारी से नियमित अध्ययन एवं अभ्यास करें।

क्या अकेला क्लासरूम कोचिंग मार्गदर्शन पर्याप्त है अंग्रेजी सीखने हेतु?

How To Learn Spoken English Through Hindi

अंग्रेजी सीखने के इच्छुक अधिकांश लोग क्लासरूम कोचिंग के विकल्प को ही अपनाते हैं। इसका प्रमुख कारण है कोचिंग कक्षाओं का प्रचार तथा दूसरा कारण है कुछ अन्य गलतफहमियाँ। इसमें कोई शंका नहीं कि क्लासरूम कोचिंग प्रारम्भिक तौर पर तो आपको अंग्रेजी भाषा की कुछ जानकारी दे सकते हैं लेकिन उचित अध्ययन सामग्री के अभाव में विद्यार्थी केवल कुछ परिस्थितियों में बोले जाने वाले एक-दो पंक्ति के वाक्य या एक वाक्य का प्रश्न या एक-दो वाक्य का जवाब देना ही सीख पाते हैं लेकिन जब किसी विषय पर विस्तृत रूप से बोलने का अवसर आता है तो बगलें झाँकने लगते हैं।

दोस्तो! क्लासरूम कोचिंग की अपनी सीमाएं हैं। एक शिक्षक रोजाना एक-डेढ़ घंटे दो-तीन महीने में दुनिया की सबसे समृद्ध भाषा के सम्बन्ध में कितनी जानकारी दे पायेगा। अत: ऐसी परिस्थितियों में आपको चाहिये ऐसी पाठ्य पुस्तकें जो आपको दैनिक प्रयोग में आने वाली वाक्य संरचनाओं एवं दैनिक वार्तालाप में प्रयुक्त होने वाली शब्दावली की दे सके सम्पूर्ण जानकारी।

FLUENCY THROUGH SELF-STUDY

ध्यान रखें आप स्वयं ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जो धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलना सीखने हेतु स्वयं की सहायता कर सकते हैं, कोई अन्य व्यक्ति नहीं। अन्य व्यक्ति आपको कुछ जानकारियाँदे सकते हैं लेकिन बोलना तो आप स्वयं द्वारा ही किया जाने वाला कार्य है। बोलने हेतु आप स्वयं को ही अपने Speech Organs (tongue, teeth, lips, etc. mouth organs) #1 offs of Tosi on # 3TTo Tso its of Tol पुस्तकें जिन्हें बोल-बोल कर पढ़ने से आपके speech organs अंग्रेजी शब्दों को बोलने के अभ्यस्त हो सकें। आपको चाहिए ऐसी पाठ्य पुस्तकें जो आपको दे सके दैनिक बोलचाल में प्रयुक्त होने वाले सभी शब्दों की-Total Mastery. जी हाँ-Total Mastery

आइये इस हेतु एक उदाहरण समझते हैं। उदाहरण बतौर एक शब्द लेते हैं-Apply. इस शब्द का सामान्य हिन्दी अर्थ होता है-आवेदन करना। लेकिन यह शब्द विभिन्न शब्द समूहों में प्रयुक्त होने पर अन्य भाव व्यक्त करने हेतु भी किया जाता है, जैसे

To apply the brake(s) – ब्रेक लगाना

To apply a rule/ principle = कोई नियम/ सिद्धान्त लागृ करना

To apply one’s mind  – अपना दिमाग लगाना

To apply force = जोर/ताकत लगाना

To apply balm (on forehead) =  सर पर बाम लगाना

To apply oneself to a work = अपने आप को किसी काम में लगाना

देखिये इस प्रकार एक ही शब्द को अनेक भाव व्यक्त करने हेतु विभिन्न शब्द समूहों में कैसे प्रयोग किया जाता है। शब्दों की ऐसी जानकारी किसी

शिक्षक द्वारा एक सीमित समय में दिया जाना असम्भव-सा है। यही कारण है दो-तीन महीने किसी कोचिंग में पढ़ चुके अधिकांश लोग एक दो वाक्यों की काम चलाऊ अंग्रेजी ही बोल पाते हैं।

अनुवाद पद्धति – एक गलत तरीका

अंग्रेजी में ही सोचना प्रारम्भ करें-अंग्रेजी सीखने के इच्छुक अधिकतर लोग गलत तरीके से अंग्रेजी सीखने का प्रयास करते हैं। अधिकांश हिन्दी भाषी लोग सर्वप्रथम हिन्दी में सोचते हैं फिर वे अपने इन विचारों को अंग्रेजी में अनुवाद करते हैं। यह बिल्कुल उल्टागलत तरीका है। एक बार एक विद्यार्थी कहना चाहता था”आजकल मेरे बाल काफी उड़ रहे हैं”, जिसका उसने अंग्रेजी अनुवाद इस प्रकार किया -“My hairs are flying too much now a days’ यह हिन्दी से अंग्रेजी अनुवाद का ही परिणाम है। ध्यान रहे हम किसी भी एक भाषा का दूसरी भाषा में शब्द-स-शब्द अनुवाद नहीं कर सकते। हमें केवल उसका भाव व्यक्त करना है। इस हेतु किसी शब्द विशेष के पीछे नहीं जाना है।

ध्यान रहे, धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलना सीखने हेतु हमें अंग्रेजी में ही सोचना प्रारम्भ करना पड़ेगा।इस हेतु हमें अधिक-से-अधिक अंग्रेजी पत्र पत्रिकाएं, लेख, आलेख, अंग्रेजी भाषा की अच्छी पुस्तकें पढ़ने तथा अधिक-से-अधिक शब्द सीखने चाहिये। शब्दों के ज्ञान से हमारी कल्पना एवं सोचने की क्षमता बढ़ेगी। हमारे दैनिक जीवन में प्रयुक्त अंग्रेजी शब्दों, वाक्यों, वाक्य संरचनाओं का अधिक-से-अधिक ज्ञान प्राप्त करना होगा।

क्या बिना व्याकरण के अंग्रेजी सीख सकते हैं ?

यह अत्यन्त महत्वपूर्ण प्रश्न है। इसका उत्तर हाँ एवं नहीं दोनों ही हो सकता है। हाँ, इसलिए कि हमने अपनी मातृभाषा बिना व्याकरण के ज्ञान के ही बोलना सीखी है। लेकिन ध्यान रहे हमने अपनी मातृभाषा अपने जन्म से ही सुनना प्रारम्भ कर दी थी एवं मातृभाषा सीखने से पूर्व हमें वार्तालाप की कोई अन्य भाषा भी नहीं आती थी। वर्षों तक इस भाषा को सुनते रहने के कारण हम इसे बोलने में पारंगत हो गये। तो क्या हम अब अंग्रेजी भी बिना व्याकरण के सीख सकते हैं? हाँ, सीख सकते हैं बशर्ते कि आप वर्षों तक ऐसे वातावरण / स्थान में रहें जहाँ अंग्रेजी के अलावा कोई और भाषा बोली ही नहीं जाती हैं तथा आप भी बाल-सुलभ उत्सुकता से सीखने, सुनने व बोलने का अभ्यास करते रहें। लेकिन यह बड़ा लम्बा चलने वाला सिलसिला है जिसमें हमें वर्षों लग जायेंगे। मात्र कुछ दिनों या घंटों में यह सम्भव नहीं है।

कुछ संस्थान यह दावा भी करते हैं कि वे बिना व्याकरण के कुछ दिनों में आपको अंग्रेजी बोलना सिखा देंगे। हमारे अनुभव के अनुसार यह सत्य नहीं है।

किसी विद्वान ने कहा है

“Grammar is the life blood of a language.”

अतः अच्छी अंग्रेजी बोलना व लिखना सीखने हेतु व्याकरण का ज्ञान आवश्यक है।

लेकिन इसका तात्पर्य यह भी नहीं है कि अंग्रेजी सीखने हेतु हमें व्याकरण संबंधी समस्त नियमों एवं उपनियमों को आत्मसात् करना पड़ेगा, सीखना पड़ेगा।नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं। लेकिन हमें व्याकरण का आधारभूत ज्ञान अवश्य लेना होगा। जैसे कि बीते हुए समय (भूतकाल) की क्रिया व्यक्त करने हेतु क्रिया के द्वितीय (भूतकाल / PastTense) रूप का: वर्तमान की आदत, गतिविधि, नियमित, कार्य बताने हेतु क्रिया के मूलरूप एवं एकवचन कर्ता के साथ इसमेंs याes आदि का प्रयोग करना होता है। इसी प्रकार कर्ता I के साथ वर्तमान Eu e xa a s काल मेंbe क्रिया का am रूप, भूतकाल में was, you के साथ are एवं were, He के साथ is, was का प्रयोग करना होता है। इसके अतिरिक्त हमें एक बात और समझ लेना चाहिये कि बिना प्राथमिक वाक्य संरचनाओं को समझे अंग्रेजी जैसी विदेशी भाषा पर अधिकार प्राप्त करना असम्भव ही है।

अंग्रेजी सीखने हेतु उचित मार्ग

Spoken English Through Hindi

अंग्रेजी भाषा सीखने हेतु सर्वप्रथम आपको दैनिक बोलचाल में प्रयुक्त होने वाले 5-6 हजार शब्दों का सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त करना होगा। बोलचाल में प्रयुक्त ये शब्द लेखक की पुस्तक (Word Bank for Spoken English) में दिये गयें। अत: आप इस पुस्तक का अध्ययन करें। आपको इन शब्दों के Grammatical के साथ इनके अर्थ भी समझने व जानने होंगे। लेकिन इन शब्दों के अर्थ (meaning) जानना ही पर्याप्त नहीं होगा। बल्कि इन शब्दों से बनने वाले अनेक अर्थपूर्ण शब्द-समूह जानने होंगे.

 

 

आप एक-एक शब्द को जोड़कर धाराप्रवाह अंग्रेजी नहीं बोल सकते हैं। धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने हेतु आपको चाहिये Ready to use meaningful Word Groups fi ldea units gră, fărgi griffgi Vocabulary for fluency building a Iră ă जिनमें हजारों ऐसे Idea units दिये हैं जो आपको धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने में 100 प्रतिशत सहायक होंगे।

दोस्तो! बिना अटके, बेझिझक अंग्रेजी बोलना सीखने हेतु आपको अंग्रेजी भाषा की विभिन्न वाक्य संरचनाओं का ज्ञान होना अत्यन्त आवश्यक है। ध्यान रखिये, शब्दों को उचित क्रम में रखने पर ही वे पूर्ण अर्थ देंगे। ध्यान रखिये, हिन्दी एवं अंग्रेजी की वाक्य संरचनायें बिल्कुल भिन्न होती हैं। हिन्दी वाक्य संरचनाओं के आधार पर यदि अंग्रेजी भाषा के शब्दों को जोड़कर वाक्य बनायेंगे तो ऐसे बने वाक्य एकदम गलत होंगे। अत: आपको सीधे तौर पर ही अंग्रेजी भाषा की वाक्य संरचनाओं को आत्मसात् करना चाहिए। अंग्रेजी भाषा की समस्त प्रकार की वाक्य संरचनाओं को हमारी वेबसाइट  में सम्मिलित किया गया है। साथ ही गहन अभ्यास हेतु अनेक Practice Exercise दी गई हैं जिनके अभ्यास से आपके speech organs (tongue, teeth, lips, etc) अंग्रेजी वाक्यों को बोलने के अभ्यस्त हो जायेंगे। हमारी वेबसाइट  में इन संरचनाओं को समझाने का तरीका अत्यन्त सरल एवं 100 प्रतिशत व्यवहारिक है, जो बाजार में बिकने वाली साधारण पुस्तकों में नहीं मिल सकता है।

हमारा विश्वास है कि इन वाक्य संरचनाओं के अध्ययन से आप समस्त परिस्थितियों में बेझिझक, बिना अटके धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने की दक्षता हासिल कर लेंगे। पढ़ने की आदत डालिये

अंग्रेजी भाषा पर मजबूत पकड़ हेतु आपको काफी मात्रा में अच्छी पुस्तकें, कहानियाँ, पत्र-पत्रिकाएं, अखबार आदि पढ़ने चाहिये। प्रारम्भ में छोटी-छोटी कहानियों की किताबें पढ़े। जिस किसी भी शब्द का अर्थ न आवें, तो तुरन्त उसका अर्थ किसी शब्दकोश में देखें। यह अत्यन्त आवश्यक है। हम शब्दों को किसी संदर्भ में ही जल्दी सीख सकते हैं। तत्पश्चात् कुछ अच्छे स्तर के हल्के-फुल्के अंग्रेजी के उपन्यास पढें। कुछ पत्र-पत्रिकाएं विशेषकर जिनमें साक्षात्कार, पारस्परिक वार्तालाप दिये गये हैं, पढ़े साथ ही किसी अच्छे शिक्षक का मार्गदर्शन भी प्राप्त करते रहें। जब आपको इस भाषा का उपयुक्त ज्ञान हो जाये यानि आपको वाक्य संरचनायें समझ में आने लगे, शब्दों की अच्छी पहचान हो जाये तो अपने इस ज्ञान को नियमित रूप से बढ़ाने हेतु प्रतिदिन अंग्रेजी का कोई भी राष्ट्रीय अखबार पढ़ना प्रारम्भ कर दें। प्रतिदिन 2-3 घंटे कुछ-न-कुछ अवश्य पढे। किसी भी शब्द का अर्थ न आवे तो किसी से पूछने की बजाय तुरन्त किसी शब्दकोश का ही सहारा लें। अपने speech organs को प्रशिक्षित करें

यदि आप धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलना सीखना चाहते हैं, तो ध्यान रखें मौन रहकर पढ़ने से आप बोलना नहीं सीख पायेंगे। बोलना तो आप तभी सीख पायेंगे जब आप स्वयं बोलेंगे। शुरुआती दिनों में आप किसी भी लेख को दो बार पढ़े। प्रथम, मौन रूप से पढ़कर उसका भावार्थ, वाक्य संरचनायें शब्दों का अर्थ आदि समझें। दूसरी बार अपने Speech Organs e.g. tongue, lips, teeth आदि को प्रशिक्षित (trained) करने हेतु जोर से बोलकर पढें, मौन रूप से नहीं। जोर से पढ़ने का तात्पर्य हमारा यह नहीं है कि आप अत्यधिक जोर से पढ़े। आप सामान्य स्तर की आवाज में ही बोलें जैसे कि आप एक-दो व्यक्तियों से बात कर रहे हैं। इस प्रकार आपके speech organs को उपयुक्त प्रशिक्षण प्राप्त हो सकेगा तथा आपकी झिझक, हिचकिचाहट, बोलने में अटकना, जैसी समस्याओं से छुटकारा मिल जायेगा। सुनने का अभ्यास करें

उपरोक्त के अतिरिक्त एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य और है वह यह है कि speech organs को बोलने का प्रशिक्षण देने के साथ-साथ हमें अपने कानों (ears) को सुनने यानि अंग्रेजी शब्दों के उच्चारण, आवाज आदि को सुनने व पहचानने का उपयुक्त प्रशिक्षण देना पड़ेगा। याद रहे हमने अपनी मातृभाषा केवल सुनकर ही सीखी है। किसी ने भी हमको पहले लिखना नहीं सिखाया था। अत: अंग्रेजी बोलनासीखने हेतु अंग्रेजी सुनना भी आवश्यक है। प्रश्न उठता है कि अंग्रेजी सुने किनसे? तो वर्तमान समय में यह काफी आसान है। घर-घर में टेलीविजन एवंरेडियो उपलब्ध हैं। आप इनसे प्रतिदिन अंग्रेजी समाचार सुन सकते हैं। आप दूरदर्शन पर अंग्रेजी में प्रसारित कुछ कार्यक्रम देख सकते हैं, विशेषकर ऐसे कार्यक्रम देखें जिनमें भारतीय कलाकार हो।

FOUNDATION OF THE COURSE & IT’S CONTENTS

दोस्तो1इस पाठ्यक्रम के लेखन कार्य का मुख्य आधार युवाम संचालकों का 30 वर्षों का व्यवहारिक शैक्षणिक अनुभव है। जी हाँगत30 वर्षों में संस्था युवाम ने उत्तरी भारत के आठ राज्यों के अनेक शहरों कस्बों, प्रमुखतः जयपुर, भोपाल, इन्दौर, मुम्बई, नई दिल्ली, लखनऊ, बड़ौदा, रायपुर सहित सैकड़ों शहरों-कस्बों में विभिन्न विषयों के प्रशिक्षण शिविर आयोजित किये हैं। इन प्रशिक्षण शिविरों में हजारों विद्यार्थियों से गहन चर्चा, उनकी समस्याओं व अपने शिक्षण अनुभव के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि कुछ निश्चित कारणों व कुछ गलत अवधारणाओं के कारण ही अधिकांश हिन्दी भाषी व्यक्ति अंग्रेजी में कमजोर रह जाते हैं। इन कारणों का विस्तृत विश्लेषण कर इनके समाधान खोजकर प्रस्तुत पाठ्यक्रम को तैयार किया गया है। आइये इन कारणों व इनके समाधान का विस्तृत अध्ययन करते हैं

अंग्रेजी भाषा में कमजोर रह जाने व शब्दों का अच्छा ज्ञान होने व अन्य व्यक्तियों द्वारा बोली गई अंग्रेजी समझ में आ जाने के बावजूद अधिकांश व्यक्ति धाराप्रवाह रूप से अंग्रेजी बोल नहीं पाते हैं। इसके प्रमुख कारण अग्रलिखित हैं

 

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पहला कारण एवं उसका समाधान : पहले हिन्दी में सोचना तत्पश्चात् अंग्रेजी में अनुवाद करना

अधिकांश हिन्दीभाषी लोग ऐसा ही करते हैं। कारण यह है कि स्कूलों व कॉलेजों में ऐसा ही सिखाया जाता है किता है, तेहै, ती है, हो, तो यही सबसे बड़ी बाधा है।

अच्छा, एक प्रश्न का जवाब दीजिए आपने अपनी मातृभाषा को पहले बोलना सीखा या लिखना? निश्चित ही आपका जवाब होगा-बोलना। जी हाँ, बिल्कुल सही कहा आपने। लेकिन अंग्रेजी सीखने हेतु क्या किया? पहले लिखना सीखें और अब बोलना सीखने का प्रयास कर रहे हैं। एकदम उल्टा प्रयास कर रहे हैं। तो अब क्या करें? यदि आप धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलना सीखना चाहते हैं, तो आपको बिना अपनी मातृभाषा में सोचेसीधे तौर पर अंग्रेजी में वाक्य बनाना सीखना होगा, अंग्रेजी में ही सोचना व बोलना होगा। जी हाँ, अपनी मातृभाषा में सोचे बिना ही, लेकिन कैसे….? चिन्ता न करें, इस हेतु हमने एक अत्यन्त चमत्कारिक वाक्यसंरचना की खोज की है। हमने इसे Yuwam sentence Generating structure (YSGS) नाम दिया है। अब से पहले आपने इस प्रकार की संरचना के संबंध में किसी भी पुस्तक में नहीं पढ़ा होगा और न ही किसी कक्षा में.

 

आप यदि किसी भी ActionGroup को किसी भी Speech initiatorसे जोड़ देंगे, तो एक सम्पूर्ण अर्थवाला वाक्य बन जायेगा। यदि आप एक व्यवस्थित क्रम में सर्वप्रथम प्रत्येक Action Group को क्रमश: सभी Speech initiators से जोड़ दें, तो 70 वाक्य बन जायेंगे। आप चाहें तो प्रत्येक Speech initiator को क्रमशः सभी Action Groups से जोड़ दें तो भी 70 वाक्य बन जायेंगे। इस प्रकार आप बिना हिन्दी में सोचे ही सीधे तौर पर अंग्रेजी भाषा में 140 वाक्य बनाकर इन्हें बोलने का अभ्यास कर सकते हैं। अब यदि आप इस प्रकार बने 140 वाक्यों में प्रत्येक के पहलेwhy when, where, how, what लगा दें पुनः 700 अर्थपूर्ण वाक्य बन जायेंगे। बस यह ध्यान रखेंwhat से प्रश्न पूछने पर क्रिया का कर्म (Direct Object) #2 *

इस प्रकार पाठ्यक्रम में दी गई सैकड़ों YSGs से आप हजारों वाक्य बनाकर उन्हें बोल-बोल कर पढें ताकि विभिन्न वाक्य संरचनाएँ आपके अवचेतन मस्तिष्क में स्पष्ट तौर पर अंकित हो जायें।

दूसरा कारण एवं उसका समाधान : बोलचाल में प्रयुक्त शब्दों की Total Mastery न होनाअंग्रेजी बोलना सीखे

क्या कारण है कि अंग्रेजी शब्दों की अच्छी जानकारी होने के बावजूद अधिकांश व्यक्ति बोल नहीं पाते हैं। कारण यह कि हम स्कूल व कॉलेज में अंग्रेजी शब्दों के Basic Meanings ही अपनी मातृभाषा में सीखते हैं। उदाहरण बतौर meet का अर्थ हम सामान्य तौर पर मिलना ही सीखते हैं। लेकिन जब इसे अन्य शब्दों के साथ जोड़कर शब्द समूह बनाते हैं तो इसका अर्थ बदल जाता है, जैसे Meet with an accident में Meet अर्थ मिलना तो बिल्कुल नहीं हुआ। इसी प्रकार –

  • meet with opposition – meet sb’s requirements’ needs – meet the needs of sth – meet one’s fate/ death) end – meet a challenge.

देखिए किस प्रकार विभिन्न शब्द समूहों में meet के अलग-अलग भाव व्यक्त हो रहे हैं। तो दोस्तो! यदि आप धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलना सीखना चाहते हैं, तो दैनिक वार्तालाप में प्रयुक्त शब्दों का अर्थ जान लेना ही पर्याप्त नहीं है। आपको इन शब्दों से बनने वाले विभिन्न अर्थपूर्ण शब्द समूहों

 

 

  1. Noun Groups of Naming part
  2. Adjectival Groups of HDescriptive part
  3. Verb Groups of Action part

 

 

  1. Naming part:

इस प्रकार के शब्द समूहों का मुख्य अंग कोई Noun होता है। जैसेability से बने कुछ शब्द समूह इस प्रकार है

  • ability to speak English-ability to solve the problems • ability of our soldiers • ability to cope with problems
  • Sb’s ability in oral comprehension • Students of mixed abilities • To the best of one’s ability – great ability
  • different abilities • musical ability – to acquire an ability – to develop an ability.

देखिये किस प्रकार एक ही संज्ञा ability को अन्य शब्दों से जोड़कर ideas units बनाये गये हैं।

  1. Descriptive part:

इस प्रकार के Idea Units का मुख्य अंग कोई adjective होता है। आइये एक adjective angry’ से किस प्रकार अर्थपूर्ण शब्द समूह बनाये गये हैं

Ll – become angry – feel angry – get angry – look angry – make sh angry • be angry with sh

U – angry argument – angry crowd- angry expression-angry look- angry protest- angry response समझिए एक adjective के पहले किस प्रकार क्रिया का एवं इसके बाद किस प्रकार संज्ञा का प्रयोग कर विभिन्न शब्द समूह (wordgroups) बनाये गये हैं।

  1. Action part:

इस प्रकार के शब्द समूहों का मुख्य अंग कोई क्रिया (verb) होती है। आइये नीचे एक क्रियाcommunicate से बनने वाले Idea Units को समझते हैं।

  • communicatesthtosb-communicate the message to your friend-communicate information to the police
  • communicate one’s feeling to sb-communicate one’s anxiety/concern to sb-communicate one’s knowledge to others – communicate one’s ideas/opinions to sb – communicate so that…….. – we communicate with each other by phone / by e-mail / by letters.

दोस्तो! बाजार में बिकने वाले सामान्य English speaking courses में इस प्रकार के शब्द समूह नहीं मिलते हैं तथा न ही क्लास रूम कोचिंग में इन्हें सीखा जा सकता है। इन्हें सीखने हेतु तो आपको स्वयं को ही प्रयास करने होंगे। और आप इन्हें सीख सकते हैं हमारी वेबसाइट  से। बोलचाल में प्रयुक्त होने वाले सभी Word Groups/idea units को हमने पाठ्यक्रम की विभिन्न पुस्तकों में समाहित किया है। यदि आपTrue Fluency प्राप्त करना चाहते हैं तो आपको इन्हें सीखना ही होगा। तीसरा कारण एवं उसका समाधान : शब्दों के संयोजन (word Junctions) की सही जानकारी नहीं होना

जब भी हम कुछ बालेंगे तो हमें विभिन्न शब्दों को जोड़ना होगा। शब्दों के संयोजन (WordJunctions) की सही जानकारी से ही हम धाराप्रवाह बोल पायेंगे। विभिन्न Word Junctions निम्न चार प्रकार के होते हैं

  1. Consonant-Consonant Junctions;*:
  • bad boy – annual bonus – big chance उपरोक्त शब्द समूहों के प्रथम शब्दों के अन्तिम अक्षर तथा दूसरें शब्दों के पहले अक्षर कोई consonant हैं।
  1. Consonant-Vowel Junctions; to:

– was angry – young age – will ask इन शब्द समूहों के प्रथम शब्दों के अन्तिम अक्षर कोई consonant तथा दूसरे शब्दों के पहले अक्षर कोई vowel होते हैं।

  1. Vowel – Vowel Junctions; #à:

era of – we aim – see if

उपरोक्त के प्रथम शब्दों के अन्तिम अक्षर तथा दूसरे शब्दों के प्रथम कोई vowel होते हैं।

  1. Vowel-Consonant Junction; ##:
  • he was – who gave – see now

देखिए उपरोक्त शब्द समूहों के प्रथम शब्दों के अन्तिम अक्षर कोई vowel है तो दूसरे शब्दों के प्रथम अक्षर कोई consonant है। अधिकांश लोग धाराप्रवाह अंग्रेजी इसलिए नहीं बोल पाते हैं कि उन्हें इन word Junctions की सही जानकारी व इन्हें जोड़ने की सही Techniques मालूम नहीं होती जिसके अभाव में वे केवल Broken English ही बोल पाते हैं। हमारी वेबसाइट  में इनकी सही जानकारी व अभ्यास हेतु बहुत से word Junctions दिये गये हैं। सामान्यतया कोचिंग कक्षायें इनकी जानकारी नहीं देते हैं।

चौथा कारण एवं उसका समाधान : speech organs का उचित प्रशिक्षित न होना

दोस्तो! यदि आप यदा-कदा बोले जाने वाले कुछ काम चलाऊ वाक्यों की ही अंग्रेजी सीखना चाहते हैं, तो आज सैकड़ों पुस्तकें बाजार में उपलब्ध हैं। आप आजाद हैं उन्हें खरीदकर अपना पैसा बर्बाद कर सकते हैं।

लेकिन यदि आप अंग्रेजी में Real Fluency प्राप्त करना चाहते हैं, तो किसी शार्टकट का चक्कर छोड़, हमारी वेबसाइट  को अपनायें, कड़ी मेहनत करें, सही दिशा में प्रयास करें, अपना शब्द कोष बढ़ायें एवं प्रत्येक परिस्थिति में बेझिझक आत्मविश्वास के साथ धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलें।

ध्यान रहे, आपकी मेहनत ही सफलता की गारण्टी है। दोस्तो! हम एक बार पुनः दोहराना चाहते हैं कि धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलना सीखने हेतु शब्दों का अर्थ जानना ही काफी नहीं है। हमें इन शब्दों से बनने वाले अर्थपूर्ण शब्द समूहों का ज्ञान होना अत्यन्त आवश्यक है। मैं व्यक्तिगत रूप से ऐसे बहुत से लोगों को जानता हूँ जो अंग्रेजी के बहुत से शब्दों की अच्छी जानकारी रखते हैं यानि उनकी vocabulary बहुत अच्छी है। पढ़ने व सुनने पर सब कुछ समझ लेते हैं लेकिन जब बोलने की बात आती है तो बगलें झांकने लगते हैं या फिर दो चार से ज्यादा वाक्य नहीं बोल पाते हैं। ऐसा क्यों ? इसके प्रमुख कारण निम्नानुसार हैं

  1. ऐस लोग हिन्दी से अंग्रेजी में अनुवाद के आधार पर एक-एक शब्द को जोड़कर बोलने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार ये लोग spoken English को भी Written English/Translation style में बोलने का प्रयास करते है. यह गलत तरीका है अंग्रेजी बोलने का सही तरीका का है की हम से ग्रुप में बोले.
  2. ऐसे लोगों को केवल शब्दों का अर्थ ही आता है एवं किसी शब्द का अर्थ जानना या सीखना एक मस्तिष्कीय कार्य है जबकि बोलने का speech organs (tongue, lips, teeth etc) का है. अत है हमारे speech organs अंग्रेजी शब्दों का उचारण करने के लिए अच्छी तरह से प्रशिक्षित (trained) होने चाहिए।

 

 

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