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नींबू के 1000 फायदे |मोटापा,सुन्दरता,पेट,हर बिमारी का इलाज

नींबू का सेवन हर मौसम में किया जा सकता है। यह बदलते मौसम के अनुरूप अपने गुणों को समायोजित कर मौसम सम्बन्धी दोषों से बचाता है। नींबू का मुख्य कार्य शरीर के विर्षों को नष्ट कर उन्हें बाहर निकालना है। यह मुँह के स्वाद को ठीक करके भोजन के प्रति रुचि पैदा करता है। रक्त शुद्ध कर त्वचा को नवीन आभा देता है। नींबू को नमक में रखने से वह कई दिन तक ताजा बना रहता है। नींबू का प्रभाव क्षारीय है। सब्जियों में नींबू पकाते समय नहीं डालें, सब्जी पकाकर उतारते समय डालें। नींबू में साइट्रिक एसिड (अम्ल) होने पर भी पेट में इसका दुष्प्रभाव नहीं होता। नींबू पेट में क्षार की उत्पत्ति करता है जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। नींबू में पाया जाने वाला फॉस्फोरस शरीर में नये तन्तुओं के विकास में सहायक होता है। पोटेशियम लवण स्वयं क्षारमय होने से उन तन्तुओं की रक्षा करता है और रक्त में अम्लता की वृद्धि को रोकता है। नींबू की शिकंजी व्रत या उपवास के दिनों में अधिक मात्रा में पियें। नींबू पेट के सारे विकार पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देता है। शरीर में विजातीय द्रव्य व विष जमा होने से व्यक्ति बीमार होता है। प्रात: एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर एक चम्मच अदरक का रस डालकर नित्य पीने से शरीर शुद्ध व नीरोग रहता है। – शक्तिवर्धक (Tonic)–(1) एक गिलास उबलते हुए पानी में एक नींबू निचोड़कर पीते रहने से शरीर के अंग-अंग में नई शक्ति अनुभव होने लगती है। नेत्र-ज्योति तेज हो। जाती है। मानसिक दुर्बलता, सिरदर्द, पुट्ठों में झटके लगना बन्द हो जाते हैं। अधिक कार्य से भी थकावट नहीं आती। इसे बिना शक्कर और नमक मिलाए छोटे-छोटे ईंटों में सीत चाहिए। चाहें तो शहद की दो चम्मच मिला सकते हैं। शक्कर और नमक का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है असावॆ सॆ” * लम्बे समय तक उपवास रखने के बाद खाना नहीं दिया जाता, परन्तु पानी में नींबू का स मिलाकर बार-बार पीते रहने से रोगी के शरीर से दूषित पदार्थ निकल जाते हैं और रोग दूर हो जाते हैं। इसके नियमित सेवन से स्फूर्ति रहती है।

(2) 40 ग्राम किशमिश, 6 मुनक्के, 6 बादाम, 6 पिस्ते रात को आधा किलो पानी में काँच के बर्तन में भिगो दें। प्रात: छानकर पीसकर इसी पानी में मिलाकर एक चम्मच शहद और एक नींबू निचोड़कर भूखे पेट पियें। इससे मानसिक व शारीरिक कमजोरी, थकान ईर हो जाती है। यह इन्द्रियों की/शक्ति के लिए लाभदायक है। – (3) शक्तिवर्धक गर्म पेय-एक कप उबला हुआ पानी, एक चुटकी सेंधा नमक, एक चुटकी काला नमक, एक चम्मच चीनी, दस बूंद नींबू का रस, भुना-पिसा हुआ चौथाई चम्मच जीरा सबको मिलाकर पियें। यह पेय बहुत स्वादिष्ट, पाचनशक्ति और शारीरिक शक्ति बढ़ाने वाला है। इसे चाय की जगह पियें तो अच्छा है। ये मिलाई जाने वाली चीजें स्वाद के अनुसार और परहेज के अनुसार घटा-बढ़ा सकते हैं। इस पेय को बीमारी की अवस्था में भी ले सकते हैं। इसे तीन बार तक नित्य पिया करें। (4) तीन छुहारे गुठली निकालकर टुकड़े कर लें। एक गिलास पानी में छुहारे, 15 किशमिश, एक नींबू का रस डालकर रात को खुले में छत पर रख दें। प्रातः मञ्जन करके पानी पी जायें तथा छुहारे, किशमिश खा जायें। लगातार चार महीने तक सेवन करें। चेहरा चमकने लगेगा। शर्बत–1 किलो चीनी, 350 मिलीलीटर पानी, 2 नींबू का रस—इन तीनों को मिलाकर, उबाल देकर कपड़े से छान लें। ठण्डा कर काँच की बोतल में भरें। यह चाशनी वर्ष-भर खराब नहीं होती। इसे शर्बत की तरह प्रयोग करें।

उत्पन्न दोष भी दूर हो जाते हैं।

– विटामिन ‘सी’ संतरा कुल के सभी फुलों, जैसे नींबू, चकोतरा, मौसमी, माल्टा तथा संतरा में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त विटामिन ‘सी’ का एक अन्य स्रोत अॉवला भी है। पर आँवले का विटामिन सी अन्य कई यौगिकों के साथ मिलकर एक

दीर्घकालीन सेवन के बाद ही प्राप्त होता है। इसके विपरीत संतरा कुल के सभी फलों में पाया जाने वाला विटामिन सी बहुत आसानी से शरीर में स्वांगीकृत हो जाता है और

जल जाभ प्रदान करता है। नींबू का विशेष महत्त्व इसमें पाये जाने वाले विटामिन ‘सी’ _ अर्थात् एस्कार्बिक अम्ल के कारण है। वाले

में रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करने में भी विटामिन ‘सी’ बहुत अनिवार्य है। यह विटामिन् शरीर में संचित नहीं रहता, इसलिये इसकी पूर्ति के लिये शरीर को प्रतिदिन कुछ मात्रा में विटामिन सी अनिवार्य रूप से प्राप्त होना चाहिये वरना शरीर में विभिन्न प्रकार के उपापचय सम्बन्धी रोग उत्पन्न हो जाते हैं तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है। विटामिन सी का प्रमुख गुण शरीर में प्रतिरोधक शक्ति का विकास करना है। नींबू के रस में पाये जाने वाली विटामिन ‘सी’ की प्रचुर मात्रा के कारण नींबू को प्राकृतिक शक्तिवर्धक फल के रूप में बहुत महत्त्व दिया जाता है। , , , प्रतिदिन भोजन के साथ एक नींबू का प्रयोग करने से शरीर को विटामिन ‘सी’ की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध होती है। रक्तविकार—उबलते हुए पानी का एक गिलास भरकर इसमें दो नींबू निचोड़कर पीने योग्य ठण्डा होने पर नित्य प्रातः एक मास तक पीते रहने से रक्त-विकार ठीक हो जाता है। रक्तक्षीणता (Anaemia)-(1) जिनके शरीर में रक्त की कमी हो, शरीर दिन पर दिन गिरता जाए, उन्हें नींबू और टमाटर के रस का सेवन लाभ पहुँचाता है। (2) नींबू के रस को एक गिलास पानी में मिलाकर स्वादानुसार नमक मिलाकर पीना चाहिए। इससे शरीर में रक्ताल्पता सम्बन्धी दोष दूर हो जाते हैं। रक्तवर्धक—(1) एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर इसमें 25 ग्राम किशमिश डाल दें। इसे रात को खुले स्थान पर रख दें। प्रातः भीगी हुई किशमिश खाते जायें और यह पानी पी जायें। इस प्रकार नींबू पानी में भिगी हुई किशमिश खाने से रक्त बढ़ता है जिससे रक्त की कमी के रोगों में लाभ होता है। (2) मूली काटकर अदरक के टुकड़े और नींबू डालकर खायें। इससे रक्त की कमी दूर हो जाती है। नाखून न बढ़ना—(1) यदि आपके नाखून न बढ़ते हों तो गर्म पानी में नींबू निचोड़कर उसमें पाँच मिनट तक अँगुलियाँ रखें, फिर तुरन्त ही हाथ ठण्डे पानी में रखें। इससे नाखून बढ़ने लगेंगे। (2) नाखूनों पर नींबू का रस लगाने से वे बहुत मजबूत और सुन्दर रहते हैं। अँगुलियों को धोकर उनके अग्रभाग पर नींबू रगड़कर सुखा लें। नाखूनों के पास की त्वचा पकती हो तो नींबू के हरे पत्ते और नमक पीसकर लगायें। 15 दिन लगाने पर आप देखेंगे कि नाखूनों की त्वचा पकना बन्द हो गई है। आयु बढ़ना—प्रो. स्कमोल के अनुसार यदि थोड़ा-सा नींबू नित्य सेवन किया जाए तो आयु बढ़ती है। नींबू का अधिक सेवन हानिकारक है। पाचन संस्थान के रोग—यदि आपके पाचन अंग कार्य नहीं करते, भोजन नहीं पचता, पेट में गैस के कारण हृदय पर बोझ अनुभव होता है, पेट फूल जाता है, रात की नींद नहीं आती, भोजन भली प्रकार नहीं पचता तो एक गिलास गर्म पानी में एक नोलूक स मिलाकर बार-बार पियें, इससे पाचन-अंग और शरीर की धुलाई हो जाती है। रक्त और शरीर के समस्त विषैले पदार्थ मूत्र द्वारा निकल जाते हैं। कुछ ही दिनों में शरीर में नई स्कँति 

पीने से भूख अच्छी लगती है।

12 भोजन के द्वारा चिकित्सा

ওী হানিন होने लगती है। अपच होने पर नींबू की फॉक पर नमक डालकर गर्म # हैंHतिसैल जाता है। यक्त के समस्त रोगों में तीव्र लाभदायक

है। पेट दर्द-(१) 12 ग्राम नींबू का रस, 6 ग्राम अदरक का रस और 6 ग्राम ** मिलाकर पीने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है। (2) नींबू की फॉक में काला नम** कलोमिर्च और जीरा भरकर गर्म करके चूसने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है। कीड़े (कूमि) नष्ट हो जाते है। (3) अजीर्ण, अपच, गैस, अधिक खाना आदि कारणों से पेट दुर्द ही ती एक कप गर्म पानी मैं नींबू निचोड़े। इसमें एक चम्मच चीनी, ज़रा-सा नमक, पिसी हुई अजवायन और जीरा मिलाकर पिथे। पेट दर्द शीघ्र मिट जायेगा। (4) 50 ग्राम पोदीने की चटनी पतले कपड़े में डालकर निचोड़कर रस निकालकर इसमें आधा नींबू निचोड़े। दो चम्मच शहद, चार चम्मच पानी मिलाकर पीने से पेट का तेज दर्द शीघ्र बन्द हो जाता है। (5) आधा कप पानी, दस पिसी हुई कालीमिर्च, एक चम्मच अदरक का रस, आधे नींबू का रस सब मिलाकर पीने से पेट दर्द ठीक हो जाता है। स्वाद के लिए चीनी या शहद चाहें तो मिला लें। – (6) एक नींबू, काला नमक, कालीमिर्च, चौथाई चम्मच सोंठ, आधा गिलास पानी में मिलाकर पीने से पेट दर्द ठीक हो जाता है। (7) अजवायन, सेंधा नमक को नींबू के रस में भिगोकर सुखा लें। पेट दर्द होने पर एक चम्मच चबाकर पानी पियें। इस प्रकार हर एक घण्टे से, जब तक दर्द रहे, लें। पेट का सेंक करें। नमक, जीरा, चीनी, अजवायन सभी आधा-आधा चम्मच लेकर नींबू निचोड़कर, पीसकर चटनी बनाकर खाने से पेट दर्द ठीक हो जाता है। (8) कीड़ों के कारण पेट दर्द हो, पेट में कीड़े हों तो सात दिन तक नित्य दी बार नींबू की एक फॉक में पिसा हुआ जीरा, कालीमिर्च, काला नमक भरकर चूसें। (9) मूली पर नमक, नींबू, कालीमिर्च डालकर खाने से अपच के कारण होने वाला पेट दर्द ठीक हो। ಕ್ಡ कप पानी में भुना हुआ जीरा, पिसी हुई अजवायन, नींबू और चीनी सब स्वादानुसार मिलाकर नित्य चार बार पियें। हुई नींबू (11) रोगी को पेट दर्द खाना खाने के बाद होता है तो, आधा कप मूली के रस में आधा नींबू निचोड़कर नित्य दो बार पीने से पेट दर्द ठीक हो जाता है। (12) चीनी, जीरा, नमक, कालीमिर्च, एक कप गर्म पानी, नींबू मिलाकर नित्य तीन बार पियें। (13) बार-बार नींबू का पानी पीते रहने से पेट दर्द, वायु गोले का दर्द ठीक हो जाता है। – भूख न लगना, अपच होने पर—(1) भोजन से पहले एक गिलास पानी में आधा नींबू, एक चम्मच अदरक का रस, स्वादानुसार नमक मिलाकर पीने से लाभ होता है। (2) नींबू, भुना हुआ जीरा, काला नमक और अदरक लेकर सबकी चटनी बनाकर खाने से भूख अच्छी लगती है। वर्षा में भूख प्राय: कम लगती है, उस समय यह ज्यादा लाभकारी है (3) नींबू और अदरक की चट्नी का सेवन करें। मौसम के अनुसार धनिए की पती भी मिला सकते हैं। (4) भोजन करने के आधा घण्टा पहले एक गिलास पानी में नींबू निचोड़कर

 

भूख न लगे, अजीर्ण हो, खट्टी डकारें आती हों तो—(1) एक नींबू आधा गिलास पानी में निचोड़कर शक्कर मिलाकर नित्य पियें। (2) एक चम्मच अदरक का रस, नींबू, सेंधा नमक एक गिलास पानी में मिलाकर पियें। (3) खट्टी डकारें आती हों तो गर्म पानी में नींबू निचोड़कर पियें। न7जू और अदरक क7 सेवन, खूब बढ़7ए भूख/ गुण इनके नह7 मरते च7हो ज7एँ ये सूख// प्यास अधिक लगती हो तो पानी में नींबू निचोड़कर पीने से प्यास कम लगती है। बार-बार थूकना—अदरक, नींबू के रस में डालकर खाना खाते समय नित्य खायें। बार-बार थूकना बन्द हो जायेगा। कब्ज़—(1) एक नींबू का रस एक गिलास गर्म पानी के साथ रात्रि में लेने से दस्त खुलकर आता है। (2) नींबू का रस और शक्कर प्रत्येक 12 ग्राम एक गिलास पानी में मिलाकर रात को पीने से कुछ दिनों में पुराना कब्ज़ दूर होता है। (3) गर्म पानी और नींबू प्रातः भूखे पेट पियें। एक गिलास हल्के गर्म पानी में एक नींबू निचोड़कर एनिमा लगायें। पेट साफ होगा। कृमि भी निकल जायेंगे। (4) एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू, दो चम्मच अरंडी का तेल (Castor Oll) मिलाकर रात को पियें। (5) एक चम्मच मोटी सौंफ, 5 कालीमिर्च चबायें फिर एक गिलास गर्म पानी, एक नींबू, काला नमक मिलाकर रात को नित्य पियें। (6) प्रातः भूखे पेट अमरूद पर नमक, कालीमिर्च, नींबू डालकर प्रतिदिन खायें। (7) प्रातः भूखे पेट नींबू पानी तथा रात को सोते समय नींबू की शिकञ्जी पीने से कब्ज़ दूर होती है। लम्बे समय तक पीते रहने से पुरानी कब्ज़ भी दूर हो जाती है। (8) एक अच्छा बड़ा नींबू काटकर रात को छत पर या खुले में रख दें। प्रातः एक गिलास पानी में स्वादानुसार चीनी डालकर उस नींबू को निचोड़कर, जरा-सा काला नमक अच्छी तरह मिलाकर नित्य पीने से कब्ज़ दूर हो जाती है। (9) एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू निचोड़कर चौथाई चम्मच नमक डालकर रात को पीकर सोने से कब्ज़ दूर हो जाती है। नाभि टलना—नींबू काटकर बीज निकाल दें। इसमें सुहागा (यह पंसारी के मिलता है) भुना हुआ आधा चम्मच भरकर हल्का-सा गर्म करके चूसें, टली हुई नाभि अपने स्थान पर आ जायेगी। दस्त-(1) दूध में नींबू निचोड़कर पीने से लाभ होता है। दस्त में मरोड़ हों, अाँव आती हो तो नींबू का उपयोग करें। एक नींबू का रस एक कप पानी में मिलाकर पियें। इसी प्रकार एक दिन में पाँच बार लें। इससे दस्त बन्द हो जाते हैं। (2) एक बूंद नींबू का रस, एक चम्मच पानी जरा-सा नमक और शक्कर मिलाकर नित्य पाँच बार पीने से दस्त बन्द हो जाते हैं। (3) आधे नींबू पर बाजरे के दाने के बराबर अफीम लगायें और इसे गोद ले फिर जरा-सा गर्म करके चूसें। इस तरह हर चार घण्टे से चूसें। दस्त, पेचिश बन्द हो जायेगी। (4) एक कप टण्डे पानी में चौथाई नींबू निचोड़कर स्वादानुसार नमक, चीनी मिलाकर हर दो घण्टे में पीने से दस्त बन्द हो जाते हैं। (5) दस्त थोड़ा-थोड़ा, बार-बार हो तो एक चम्मच ” ” ” विकास चौथाई का बड़े पान ” ” ” ” “*” | –

* भोजन के द्वारा चिकित्सा हैजा-गर्म पानी में नमक और नींबू का रस मिलाकर पिलायें। उल्टी हो जाने पर फिर

पिलायें। जब तक उल्टी होती रहे, पिलाते रहें। पेट की सफाई हो जायेगी। रोगी अच्छा हो जायेगा। हैजे के दिनों में नींबू का अचार खाने से हैजा तथा रोग-संक्रमण घटता है। नित्य नींबू सेवन करने से हैजे से बचाव होता है। पित्त शमन होता है। नींबू गर्म करके चीनी लगाकर चूसना, जी मिचलाने एवं हैजे में लाभप्रद है। नींबू, प्याज का रस, चीनी और पानी मिलाकर पीने से हैजे में लाभ होता है। नींबू का रस एक भाग, हरा पोदीना और प्याज का रस आधाआधा भाग मिलाकर पीने से लाभ होता है। नींबू हैजे से बचाता है। जब हैजा फैल रहा हो, किसी को हैजा हो गया हो तो सम्पर्क में आने वाले लोग नींबू का अधिकाधिक सेवन करें। नींबू चूसें, नींबू का अचार खायें। भोजन के बाद नींबू का पानी पियें। हैजा से बचाव होगा। हैजे के कीटाणु खट्टी चीजों के सेवन से नष्ट हो जाते हैं। हैजा होने पर चार चम्मच गुलाबजल, थोड़ा-सा नींबू और मिश्री मिलाकर हर दो घंटे से पियें। हैजे में लाभ होगा। हैजा के कीटाणु अम्लीय (खट्टे) पदार्थों के सेवन से नष्ट होते हैं। नींबू का रस, प्याज का रस और शहद प्रत्येक एक-एक चम्मच मिलाकर पियें। इससे हैजा ठीक हो जाता है। संग्रहणी-नींबू को बीच में से काटकर इसमें मूंग के बराबर अफीम डालकर धागे से बाँधकर अाँच पर लटकाकर सेंककर नित्य तीन दिन तक चूसें। – वायुगोला–6 ग्राम नींबू का रस आधा गिलास पानी में मिलाकर पीने से आराम होता है। गैस—एक चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच पिसी हुई अजवायन एक गिलास गर्म पानी में घोलकर पीने से गैस और पेट दर्द ठीक हो जाता है। पेचिश-(1) आधा गिलास ताजा पानी में आधा नींबू निचोड़कर दिन में 3 बार पीने से पेचिश में लाभ होता है। दूध में नींबू निचोड़कर पीने से भी लाभ होता है। (2) मिट्टी के बर्तन (शिकोरा) में 250 ग्राम दूध, स्वादानुसार शक्कर, आधा नींबू निचोड़कर मिलाकर पियें। इससे पेट में हल्की-सी जलन होगी और खून के दस्त बन्द हो जायेंगे। (3) एमोबायसिस (आमातिसार) होने पर नित्य दिन में तीन बार नींबू का पानी पीने से लाभ होता है। लगातार लेते रहने से अॉतें साफ होकर अॉव आना बन्द हो जाती है। पेट में गाँठ—(1) गाजर व चुकन्दर के मिश्रित रस का एक-एक गिलास नित्य दो बार एक- दो महीने तक पीते रहें। (2) एक गिलास चुकन्दर के रस में आधा नींबू, दो चम्मच शहद मिलाकर पीते रहें। पेट या कहीं भी गाँठ हो, पिघल जायेगी। उल्टी—जी मिचलाना आरम्भ होते ही नींबू का सेवन करना चाहिए। इससे उल्टी नहीं होती। नींबू में शक्कर और कालीमिर्च, दोनों भरकर चूसने से भी उल्टी बन्द हो जाती है। उल्टी में नींबू को गर्म नहीं करना चाहिए। नींबू का रस एक चम्मच, पानी एक चम्मच और ग्लूकोज एक चम्मच मिलाकर एक-एक घण्टे से लें। उल्टियाँ बन्द हो जायेंगी। (1) आधा कप पानी में 15 बूंद नींबू का रस, भुना-पिसा हुआ जीरा, पिसी हुई एक छोटी इलायची मिलाकर हर आधे घण्टे बाद पियें। उल्टी होना बन्द हो जायेगी। (2) नींबू के छिलके सुखाकर, जलाकर राख बना लें। चौथाई चम्मच राख, आधा चम्मच शहद में मिलाकर 

नींबू

चाटने से उल्टी बन्द हो जाती है। (3) दो छोटी इलायची पीसकर नींबू, – चूसनैसे उल्टो बन्द हो जाती है। चौथाई कर्म पानी में आधनींबू निचोड़कर मिल ज o इसकी एक चम्मच हर पन्द्रह मिनट बाद पियें। उल्टी बन्द हो जायेगी। (5) सेंधा नमक, हर धनिया पर आधा नींबू निचोड़कर, चटनी बना लें। जब तक उल्टी हो, बार-बार अधा चम्मच चाटते रहें। – – – (6) नींबू, प्याज, पोदीना की चटनी बार-बार चाटें। (7) नींबू की एकू फॉक में मि* भरकर चूसें। (8) जी मिचलाते ही, उल्टी की इच्छा होतें ही नींबू की फॉक में कला नमक कालीमिर्च भरकर चूसें। उल्टी नहीं होगी। (9) यात्रा (जल, थल, नभ, सभी) में उल्टी ही तो नींबू चूसते रहें। (10) शिशु दूध पीने के बाद उल्टी करता हो तो दूध पिलाने के कुछ देर बाद तीन बूंद नींबू का रस एक चम्मच पानी में मिलाकर पिलायें। (11) उल्टियाँ लगातार होती रहें, दवा देने पर भी बन्द नहीं हों तो नींबू के आठ बीज पीसकर तीन चम्मच पानी में घोलकर, छानकर आधा-आधा घण्टे के अन्तर से तीन बार पिलायें। उल्टियाँ बन्द हो जायेंगी। उल्टी बन्द हो जाये तो आगे नहीं पिलायें। Tataron est Swast (Morning Sickness)—(1) 100 TH ÆTHI SÍRT, 30 ग्राम सेंधा नमक पीसकर नींबू के रस में तर कर लें, ये रस में डूबे रहें, इनको भीगते रहने दें। प्रतिदिन एक बार स्टील की चम्मच से हिला दें। सूख जाने पर आधा चम्मच प्रतिदिन तीन बार चबायें। गर्भावस्था में होने वाली उल्टियाँ बन्द हो जायेंगी। (2) ठण्डे पानी में नींबू निचोड़कर पीने से गर्भावस्था की उल्टी में लाभ होता है। – शिशुओं की उल्टी—(1) नींबू के रस की पाँच बूंद तीन चम्मच पानी में मिलाकर पिलायें, शिशु दूध नहीं उलटेगा। कृमि—(1) यदि पेट में कृमि उत्पन्न हो गए हों तो नींबू के बीजों को पीसकर चूर्ण बना लें और पानी के साथ लें। इससे पेट के कृमि नष्ट हो जायेंगे। मात्रा-बड़ों के लिए एक से तीन ग्राम, बच्चों के लिए इसकी चौथाई। भूखे पेट नींबू पानी भी पियें। (2) नींबू + शहद + पानी मिलाकर नित्य 15 दिन पीने से कृमि नष्ट हो जाते हैं। अम्लपित्त-(1) नींबू अम्ल का नाश करने वाला है। नींबू का रस गर्म पानी में डालकर सायंकाल पीने से अम्लपित्त नष्ट हो जाता है। मात्रा-एक कप गर्म पानी, एक चम्मच नींबू का रस एक-एक घण्टे से तीन बार लें। (2) खाना खाने के बाद एक कप पानी में आधा नींबू, जरा-सा खाने का सोडा मिलाकर प्रतिदिन दो बार पियें। (3) दो कप ठण्डे पानी में % नींबू निचोड़कर नित्य दो बार पीने से घबराहट और सीने की जलन में लाभ होता है। (4) दोपहर में भोजन से आधा घण्टा पहले नींबू की मीठी शिकञ्जी दो महीने पियें। खाने के बाद नहीं पियें। (5) तीव्र अम्लता अर्थात् एसिडिटी के पुराने रोगियों की ताजा नींबू पानी में निचोड़कर पीना चाहिये। – (6) दो चम्मच शहद में नींबू का एक चम्मच रस मिलाकर चाटने से अम्लपित्त में लाभ होता है। नींबू में एस्कार्बिक अम्ल पाया जाता है, पर यह शरीर में सोडियम लवणों के सांद्रण को कम करता है जिसके कारण मनुष्य की आंत्र में उत्पन्न होने वाला नमक का अम्ल अर्थात् हाइड्रोक्लोरिक अम्ल शांत रहता है तथा अम्लता धीरे-धीरे कम होती है।

 

 

भोजन के द्वारा चिकित्सा जिल्ह् शख़्लुएं लिखतु के रस को अम्लीय समझते हैं। इस भूल के फलस्वरूप इसके 蠶 पहचानकर अम्लपित्त में नींबू का सेवन नहीं करते। नींबू में पाया जाने वाला

 

हिचकी—(1) नींबू का रस, शहद, दोनों एक-एक चम्मच, स्वादानुसार काला नमक मिलाकर चाटने से हिचकी बन्द हो जाती है। (2) एक नींबू का रस, एक कप गर्म पानी, जरा-सा काला नमक और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से हिचकी आना बन्द हो जाता है (3) नींबू के पेड़ से हरी पत्तियाँ तोड़कर चबाकर रस चूसें। हिचकी बन्द हो जाती है। (4) तेज गर्म पानी में नींबू निचोड़कर घूट-घूंट पीने से हिचकी बन्द हो जाती है। (5) नींबू, सोंठ, कालीमिर्च, अदरक सब अल्प मात्रा में लेकर चटनी बनाकर चाटें।

(6) नींबू में नमक भरकर बार-बार चूसें। इन प्रयोगों से हिचकी चलना बन्द होती है।

बवासीर—(1) नींबू के रस को स्वच्छ महीन कपड़े से छानकर उसमें जैतून का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर दो ग्राम की मात्रा में ग्लिसरीन सीरिंज द्वारा रात को गुदा में प्रवेश कराते रहने से बवासीर की जलन, दर्द दूर हो जाता है, मस्से छोटे हो जाते हैं। पाखाना बिना कष्ट के आने लगता है। (2) बवासीर में तेज दर्द हो तो एक नींबू का रस और इतना ही पानी मिलाकर ग्लिसरीन सीरिंज से गुदा में डालें और बाहर निकालें, दर्द में लाभ होगा। बवासीर में तेज दर्द, रक्तस्राव होने पर उपवास रखें और ताजे पानी में नींबू पियें। (3) गाय के धारोष्ण दूध से चार कप अलग-अलग भर लें। इनमें क्रमशः आधा-आधा नींबू निचोड़कर पीते जायें। एक सप्ताह सेवन करने से हर प्रकार के बवासीर नष्ट हो जायेंगे। (4) रक्तस्रावी बवासीर हो तो गर्म दूध में आधे-नींबू का रस डालकर तुरन्त हर 3 घण्टे में पिलायें। (5) नींबू काटकर दोनों फाँकों में पिसा हुआ कत्था भरें। फिर दोनों टुकड़े रात को ओस में रख दें। प्रात: दोनों टुकड़े चूस लें, इससे रक्त गिरना बन्द हो जायेगा।

(6) बवासीर (पाइल्स) में रक्त आता हो तो नींबू की फॉक में सेंधा नमक भरकर चूसने से रक्तस्राव बन्द हो जाता है।

यकृत (Liver)—यकृत की हर तरह की बीमारियों में नींबू लाभदायक है। दाल, सब्जी, शिकञ्जी हर चीज में नींबू अधिक-से-अधिक लें। नींबू, पानी व 10 कालीमिर्च मिलाकर नित्य पीते रहें। यकृत सम्बन्धी रोग ठीक हो जायेंगे। पीला ज्वर (Yellow Fever)—एक फ्रेंच चिकित्सक के अनुसार नींबू को फीके पानी कि पीले स्तर के रोग को मिलाने से रोगी शीघ्र हीक हो जाता है। इस मदत

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पीलिया (Jaundice)—(1) पत्तों सहित मूली का रस एक कप में स्वादानुसार चीनी ब नींबू का रस मिलाकर प्रातः भूखे पेट तथा रात को सोते समय दो बार प्रतिदिन पीने से पीलिया ठीक हो जाता है। (2) प्याज के टुकड़े नींबू के रस में डाल दें। स्वादानुसार नमक,

** डाल है। नित्य दो बार ओड-ओडी यह याज खाने से पीलिया ” “” |

लू (Sunstroke)—(1) प्रतिदिन प्याज खायें, नींबू की नमकीन शिकञ्जी पियें। * | –

 

या शक्कर डालकर पीने से लू का प्रभाव कम | ೧ “ “ Ïå # ಗಿಣ್ * * मस्तिष्क तरोताजा हो जाता है। नींबू का शर्बत-ठण्डे पानी में गर्म किया हुआ नींबू और शक्कर मिलाने से “*” शर्बत बन जाता है। यह पाचक, मतली और वर्मन दूर करने वाला, मलेरिया और पित ज्वर में हितकारी होता है। सिर चकराना-(1) यकृत (Liver) की गड़बड़ी, पेट की गैस से चक्कर आता शे, दौरा पड़ता हो तो गर्म पानी में नींबू निचोड़कर पीने से लाभ होता है। मात्रा—एक कप गर्म पानी, नींबू का रस डेढ़ चम्मच। (2) प्रातः नींबू की मीठी शिकञ्जी पीने से उठते-बैठते समय आने वाले चक्कर ठीक हो जाते हैं। (3) एक कप गर्म पानी में आधा नींबू निचोड़कर नित्य तीन बार पीने से चक्करों में लाभ होता है। नींद में खर्राटे आते हों तो नींबू के पत्तों को सुखाकर, पीसकर आधा चम्मच और एक चम्मच शहद में मिलाकर रात को सोते समय चाटने से लाभ होगा। अनिद्रा——सोते समय नींबू, शहद, पानी का एक गिलास पीने से नींद गहरी आती है। सिरदर्द-(1) नींबू के छिलके पीसकर सिर पर लेप करने से सिरदर्द में लाभ होता है। (2) अदरक का रस आधा चम्मच, नींबू का रस आधा चम्मच, सेंधा नमक चौथाई चम्मच मिलाकर हल्का-सा गर्म करके इसे सूचें। इससे छींकें आकर कफ, पानी निकलता है और सिरदर्द ठीक हो जाता है। सर्दी लगने से हुआ सिरदर्द, आधे सिर का दर्द (विवरप्रदाह) (साइनोसाइटिस) में अधिक लाभकारी है। (3) जिस ओर सिरदर्द हो उसके विपरीत नथुने में (अर्थात् बाईं ओर सिरदर्द हो तो दायें नथुने में) तीन बूंद नींबू के रस की डालने से आधे सिर का दर्द (हेमीक्रेनिया) जो सूर्ण के साथ घटता-बढ़ता है, ठीक हो जाता है। सिर पर रगड़ें, एक बार रगड़ने के 15 मिनट बाद पुनः रगड़े। इस तरह लगाते रहने से सिरदर्द शीघ्र ठीक हो जाता है। नींबू का रस रगड़ने के बाद सिर को हवा नहीं लगने दें। सिर बैंक लें। नींबू के प्रयोग से गर्मी के कारण होने वाला सिरदर्द शीघ्र ठीक हो जाता है। जुकाम, सिरदर्द होने पर चाय में नींबू निचोड़कर पीने से लाभ होता है। नींबू की पतियों को कूटकर रस निकालकर रस को सूंचें। जिन्हें हमेशा सिरदर्द रहता है, वे यह उपाय करें। इससे सदा के लिए सिरदर्द ठीक हो जायेगा। नींबू की पत्तियों को सुखाकर प्रतिदिन प्रातः सूंघने और चाय पीने से चमत्कारिक लाभ होगा। -वैद्य सुशील कुमार जैन, जयपुर दिल घबराना-दिल घबराने, छाती में जलन होने पर ठण्डे पानी में नींबू निचोड़कर * ಕ್ಲಿಕ್ಡಳ್ಲಕ್ಕ್! हकलाना, तुतलाना पानी में निचोड़कर -२Tाम करें। दस PTT ) कुल्ले ज्बर–(1) ज्वर जिसमें रोगी को बार-बार प्यास लगे, तो उबलते सति ***

काटकर, 250 ग्राम पानी में डालकर उबालें। जब पानी आधा रह `ಕ್ಷ್ एक खुराक है। इस प्रकार दिन में तीन बाले। जुन न करें। दो-तीन दिन इस प्रकार से हर प्रकार का ज्वर दूर हो जाता है (3) पानी में नींबू निचोड़कर बार-बार पीने से ज्वर की गमीं, ताप कम होता है। (4) ज्वर में प्यास अधिक लगती है, मुँह सूखता है, व्याकुलता बढती है। लार बनाने वाली ग्रंथियाँ लार बनाना बन्द कर देती हैं, जिससे मुँह सूखने लगता है अत: पानी में नींबू, नमक, कालीमिर्च, डालकर पियें। नींबू में नमक, कालीमिर्च भक्कर भी चूस सकते हैं। मलेरिया-मलेरिया में नमक, कालीमिर्च नींबू में भरकर गर्म करके चूसने से बुखार की गर्मी दूर हो जाती है। दो नींबू का रस नींबू के छिलकों सहित 500 ग्राम पानी में मिलाकर मिट्टी की हाँडी में रात को उबालकर आधा रहने पर रख दें। प्रातः इसे पीने से मलेरिया आना बन्द हो जाता है। पानी में नींबू निचोड़कर स्वाद के अनुसार शक्कर मिलाकर पीने से 4 दिन में मलेरिया आना बन्द हो जाता है। मलेरिया में उल्टी होने लगे तो नींबू में नमक भरकर चूसें। नींबू और गन्ने का रस मिलाकर पियें। उल्टी बन्द हो जायेगी। नींबू मलेरिया के लिए प्राकृतिक औषधि है। मलेरिया में नींबू किसी भी रूप में अधिकाधिक सेवन करने से लाभ होता है। चाय में दूध के स्थान पर नींबू डालकर पीने से मलेरिया में लाभ होता है। भोजन करते समय हरीमिर्च पर नींबू निचोड़कर खायें। मलेरिया आने से पहले नींबू में नमक भरकर चूसें या नींबू की शिकञ्जी पियें। – फिटकरी भुनी हुई, कालीमिर्च, सेंधा नमक तीनों समान मात्रा में लेकर पीस लें। नींबू की एक फॉक पर यह चूर्ण चौथाई चम्मच भरकर गर्म करके ज्वर आने के एक घण्टे पहले आधा-आधा घण्टे के अन्तर से चूसें। मलेरिया बुखार नहीं आयेगा। दो, तीन दिन यह प्रयोग करें। फ्लू (Flu)—शरीर के विभिन्न अंग और हड्डियाँ टूटने, नजला, जुकाम और फ्लू होने पर गर्म पानी में नींबू का रस पीते रहने से इन रोगों से बचा जा सकता है। ये रोग होने पर इसे बार-बार पीना चाहिए। पानी में शहद भी मिला सकते हैं। खाँसी, श्वास और ज्वर-नींबू में नमक, कालीमिर्च एवं शक्कर भरकर गर्म करके चूसने से लाभ होता है। उपदंश (Syphilis) की पहचान-स्त्री-पुरुष को उपदंश है या नहीं, यह जानने के लिए उसके शरीर के किसी भाग पर नींबू का रस लगाओ। यदि यह असह्य प्रतीत हो तो समझ लो कि उपदंश है। जुकाम—(1) यदि जुकाम बार-बार लगता है तो रात को सोते समय पगतलियों पर सरसों के तेल की मालिश करें। गर्म पानी के एक गिलास में एक नींबू निचोड़कर गम=ि गर्म एक महीने पियें। (2) जब जुकाम लग गई हो तो एक साबुत नींबू को धोकर एक गिलास पानी में उबालें। नींबू उबलने पर नींबू निकालकर काट लें और इसी गर्म पानी को एक गिलास में भरकर नींबू निचोड़े। इसमें एक चम्मच अदरक का रस, दो चम्मच शहद मिलाकर पियें । ।

 

मेथी भी खायें। ज्वर, फ्लू, सदी, श्वास, विवर-प्रदाह (साइनोसाइटिस) – “““““ (4) 蠶 *蠶 गले में जमा हुआ कॅफ भी निकल जायेगा। तेज जुकाम हो तो एक गिलास 蠶 पान में एकू नींबू इच्छानुसार शहूद मिलुक रात को सोते समय पिशुकद” कपड़े में लपेटकर ऊपर से मिट्टी का लेप करके भोभल (मंद आग) में सेंकें। सिकने के बाद नींबू निकालकर काटकर गर्म-गर्म को ही चूस लें। जुकाम शीघ्र ठीक हो जायेगा। पेट दर्द, सिरदर्द तथा जुकाम-चाय में दूध के स्थान पर नींबू निचोड़कर पियें। यह नित्य तीन बार जब तक दर्द रहे, पियें। नींबू के छिलके पीसकर दर्द वाले स्थान पर लेप करें। गला बैठना—गला बैठ जाए, गले में ललाई या सूजन हो जाए तो ताजा पानी या गर्म पानी में नींबू निचोड़कर नमक डालकर तीन बार गरारे करने से लाभ होता है। नकसीर (एपिसटेक्सिस)-(1) नींबू के रस की चार बूंद जिस नथुने से रक्त आ रहा हो, उसमें डालने से तुरन्त रक्त आना बन्द हो जाता है। (2) मूली पर नींबू निचोड़कर नित्य खाते रहने से बार-बार नकसीर आना बन्द हो जाता है। (3) अाँवला, अंगूर, गन्ना, नींबू में से किसी एक के रस की चार बूंद नाक में डालने से नकसीर आना बन्द हो जाता है। (4) पानी में मिश्री घोलकर तीन बूंद नाक में डालने से नाक से रक्त आना बन्द हो जाता है। साँस फूलना—नींबू के रस को शहद में मिलाकर चाटने से बच्चों का साँस फूलना बन्द हो जाता है। मोटापा—(1) एक नींबू, नमक, पाव भर गुनगुने पानी में मिलाकर भूखे पेट प्रातः पीने से मोटापा कम होता है। यह लगातार एक दो-माह लें। यह गर्मी के मौसम में ज्यादा उपयोगी है। यदि शहद भी मिलायें तो ज्यादा अच्छा है। इसके बाद दिन में जब भी प्यास लगे, पानी में नींबू, शहद मिलाकर पियें। शहद मिलायें तो नमक न मिलायें। (2) 3 माह सुबहशाम भूखे पेट नींबू का पानी पीने से मोटापा घटता है। (3) 125 ग्राम पानी उबालकर जब गुनगुना रह जाये तब तीन-तीन चम्मच नींबू का रस तथा शहद मिलाकर पियें। मोटापा कम होगा। यह भूखे पेट दो महीने पियें। भोजन एक बार करें। कसरत, योग, प्राणायाम नित्य करें। चोकर की रोटी, हरी सब्जियाँ खायें। शाम को फलाहार करें। भोजन के तुरन्त बाद जितना तेज गर्मागर्म पानी पिया जा सके, दो माह पियें। ,”” ” ” ” ” ” ” ” ” “स्पात और यात्रा सुखद | पर्वतारोहण—ऊँचे पहाड़ों पर चढ़ने वालों के लिए नींबू का सेवन लाभदायक है। नींबू पानी पीकर पहाड़ी पर चढ़े, चलें, यात्रा आरम्भ करें। चढ़ते समय नींबू पानी तरह प्राणवायु की कमी होने, साँस लेने में कठिनाई होने पर नींबू पानी पियें। नींबू पानी में फीका, नमकीन इच्छा और स्वादानुसार पियें।

दाँतों की सफाई व दाँतों का पीलापन—(1) नींबू की आधी निचोड़ी फॉक पर चार बूंद सरसों का तेल, जरा-सां नमक और हल्दी डुलकर दाँतों को गड़े। दाँतों का पीलापन ई होकर दाँत साफ हो जायेंगे। (2) नींबू के छिलके सुखाकू पीस लें। इसमें थोड़ा-सा खाने की सोडा और नमक मिलाकर मञ्जन करें। दाँत चमकने लगेंगे, साफ रहेंगे। दाँतों के सामान्य रोग ठीक हो जायेंगे। (3) नींबू के रस में बुश डूबोकर मञ्जन करने से दाँत चमकने लगते हैं। दाँतों को नींबू के रस से गेड़े। (4) नींबू के छिलकों को धूप में सुखाकर पीस लें और मञ्जन के रूप में काम में लें। इससे दाँत साफ होंगे और साँस की बदबू दूर होगी। नमक, सरसों का तेल और नींबू का रस मिलाकर नित्य मञ्जन करने से दाँत मजबूत होते हैं, प्रायः सभी रोग मिट जाते हैं। निचोड़े हुए नींबू के छोटे-छोटे टुकड़े करके दाँत साफ करने से दाँत चमकने लगते हैं। (5) नींबू के छिलके सुखाकर पीस लें। छिलकों के तोल का एक भाग पिसी हुई फिटकरी मिला लें। इससे नित्य मञ्जन करने से दाँत चमकदार होते हैं। मसूड़ों को शक्ति मिलती है। दाँत दर्द-(1) तीन लौंग को नींबू के रस में पीसें। यदि दाँत में छेद हो तो रुई के फोये में इसे लेकर दाँत में भर दें अन्यथा उससे दाँतों को मलें, दर्द दूर हो जायेगा। (2) एक नींबू के चार टुकड़े करके उन पर नमक डालकर एक के बाद एक गर्म करते जायें और एकएक टुकड़े को क्रमशः दुखते दाँत, दाढ़ पर रखकर दबायें। इस प्रका एक के बाद एक चारों टुकड़े दबायें। इससे दाँत-दर्द में लाभ होगा। – so दाँतों के रोग—ताजा पानी में नींबू निचोड़कर कुल्ले कुने से दाँतों के रोगों में अराम मिलता है। मसूड़े फूलना, मुँह की दुर्गन्ध दूर होती है। निचोड़े हुए नींबू से दाँत रगड़ने से दाँत साफ, सुन्दर और चमकदार होते हैं। – नींबू में मिलुने वाला विद्युमिन सी’, ‘ए’ तथा ‘डी’ के साथ मिलकर बच्चों में हड्डियों तथा दाँतों के स्वस्थ विकास में सहायता करता है। पायोरिया—नींबू का रस और शहद मसूड़ों पर मलते रहने से रक्त और पीप निकलून बन्द हो जाता है और दाँत मज़बूत हो जाते हैं। पानी में नींबू निचोड़कर कुल्ले भी करें। हृदयु रोगियों के लिए नींबू लाभदायूक है। पाँवों में पसीना-गर्म पानी के दो गिलास में एक नींबू का रस मिलाकर पगतलियों का सेंक करें, फिर इसी पानी से पगतलियाँ धोयें। गुप्तांगों की खुजली में नींबू की फॉक रगड़े। तनिक जलन, चिरमिराहट होगी लेकिन खुजली ठीक हो जायेगी। अण्डकोश, जननांगों पर नींबू का रस लगायें। खुजली—(1) नींबू चूसें एवं नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर मालि” *

नींबू Z_1 से खुजली में लाभ होता है। यदि खुजली में दाने हों तो समान मात्रा में नींबू का रस और नारियल का तेल मिलाकर इतना गर्म करें कि रस जल जाये फिर इसे खुजली वाली जगह नित्य तीन बार मलें। खुजली मिट जायेगी। नींबू के रस को नारियल के तेल में गर्म करके लगायें। नींबू में फिटकरी भरकर खुजली वाली जगह पर रगड़े। (2) गर्म पानी में नींबू निचोड़कर स्नान करने से खुजली मिट जाती है। (3) नहाने से पहले नींबू की फॉक में पिसी हुई फिटकरी भरकर खुजली वाली जगह रगड़े। दस मिनट बाद स्नान करें। खुजली में लाभ होगा। शरीर की कोमलता-दी चम्मच आटा, चार चम्मच दूध, एक चुटकी हल्दी और एक नींबू का रस मिलाकर गूंथ लें और नहाने से पहले शरीर पर मलें, दस मिनट बाद नहायें। साबुन न लगायें। इससे शरीर की कोमलता बढ़ेगी। त्वचा के रूखेपन पर नींबू भूल कर भी नहीं लगाना चाहिए, यह त्वचा को और भी रूखी कर देता है, तैलीय त्वचा पर नींबू मलने से तेल निकल जाता है। घट्टा (Corns)—घट्टा (पैरों में कील, कठोर गाँठ) पर नींबू का रस लगाकर रखने से नर्म पड़ जाते हैं। इस पर एक फॉक नींबू की भी बाँध सकते हैं। यह अनुभूत सफल प्रयोग है। रक्तशोधक, चर्म रोग-नित्य प्रातः तथा शाम को नींबू पानी पियें। चर्म रोग वाले अंगों पर नींबू रगड़कर स्नान करें। लाभ होगा। दो करेले पीसकर इसकी लुगदी पतले कपड़े में लेकर निचोड़कर, रस निकालकर इसमें आधा नींबू निचोड़ें, तीन चम्मच पानी डालकर मिलाकर पियें। इससे रक्त साफ होकर फोड़ेफुसी ठीक हो जाते हैं। रक्तशुद्धि—नींबू रक्त शुद्ध करता है। नींबू को गर्म पानी में निचोड़कर दिन में नित्य तीन बार पीना चाहिए। पानी चाय की तरह गर्म होना चाहिए। रक्त सम्बन्धी अधिकांश दोष पाचन सम्बन्धी गड़बड़ियों के कारण ही उत्पन्न होते हैं। प्रतिदिन नींबू गर्म पानी में निचोड़कर पीने से कब्ज़ पूर्णत: नष्ट हो जाता है। शरीर के पाचन तंत्र के नियमित काम करने से भोजन आसानी से पचता है और रक्त वृद्धि होती है। दाद (Eczema)—दाद को खुजलाकर दिन में चार बार, चार सप्ताह नींबू का रस लगाने से वह ठीक हो जाता है। – हाथों, अँगुलियों में खुश्की हो, हथेलिया खुरदरी, त्वचा खुरदरी हो, फटती हो तो नींबू का रस व चीनी 1-1 चम्मच मिलाकर हाथों में मलें, आपस में रगड़े। इससे त्वचा की गर्मी निकल जायेगी, त्वचा मुलायम हो जायेगी, खुजली नहीं चलेगी। फोड़े-फुसी, पेट खराब होने पर अदरक, नींबू, सेंधा नमक तीनों का मिश्रित अचार नित्य सुबह-शाम खाने से लाभ होता है। – चर्म रोग-नींबू चर्म को साफ करता है। चर्म के समस्त रोग फोड़ा-फुसी, दाद, खाज आदि में नींबू का रस लगाने या नींबू को पानी में निचोड़कर धोने, नहाने से लाभ होता है। प्रात: दो नींबू पानी में निचोड़कर नित्य पीने से चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। कान से पीप निकलना और नासूर भी ठीक हो जाते हैं। इस प्रयोग में गुड़, शक्कर, दालें न खायें।

(sun Burn)-(1) यूदि धूप से रंग काल होता है तो आधा कप ब*******ोड़क मिलकं चेहरे हाथ-पैपर है। के दुष्प्रभाव नष्ट हो जायेंगे। (2) नींबू और छाछ मिलाकर लगाने से धूप के कारण काल

ve

अलाइयाँ (Pीcky Heat)-गर्मी के मौसम में शरीर में अलाइयाँ, घमौरियाँ निकलती हैं। दिन में तीन बार नींबू पानी पीने से अलाइयाँ ठीक हो जाती हैं और फिर नहीं निकलती। अलाइयों पर नींबू का रस भी लगायें। धब्बे-सूती, ऊनी, सिल्कन, टेरीन, कैसा भी कपड़ा हो, नींबू का रस लगाकर मलने से दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं। पीतल के बर्तनों के धब्बे भी दूर हो जाते हैं। पसीने की दुर्गन्ध—नींबू के पत्तों को पीसकर मलने से पसीने की दुर्गन्ध दूर होती है। जहाँ कहीं दुर्गन्ध-युक्त पसीना आता हो, विशेषकर बगल में, जहाँ अधिकतर पसीना आता है, नींबू के पते पीसकर मलें, दुर्गन्ध नहीं आयेगी। – विषैले दंश-डॉ. हैरिंग ने कहा है कि यदि मच्छर काटने पर तेज दर्द हो तो उस पर नींबू का रस लगायें। इसका रस नमक के साथ मिलाकर बिच्छू, मकड़ी, बर्र व मधुमक्खी के काटे स्थान पर लगाने से आराम मिलता है। खटमल, पिस्सू काटने पर नींबू लगाना चाहिए। – हृदय की धड़कन—नींबू ज्ञान-तन्तुओं की उत्तेजना को शान्त करता है। इससे हृदय की अधिक धड़कन सामान्य हो जाती है। उच्च-रक्तचाप के रोगियों की रक्त-वाहिनियों को शक्ति मिलती है। रक्तचाप और हृदय की दुर्बलता-हृदय की कमजोरी दूर करने के लिए नींबू में विशेष गुण हैं। इसके निरन्तर प्रयोग से रक्तवाहिनियों में लचक और कोमलता आ जाती है और इनकी कठोरता दूर हो जाती है। इसलिए उच्च रक्तचाप जैसे रोग को दूर करने में नींबू उपयोगी है। इससे बुढ़ापे तक हृदय शक्तिशाली बना रहता है एवं हृदयाघात (HeartAttack) का भय नहीं रहता है। कैसा भी ब्लडप्रेशर हो, पानी में नींबू निचोड़कर दिन में कई बार पीने से लाभ होता है। प्रातः एक नींबू का रस गर्म पानी में मिलाकर पीना हितकारी है।

हृदय-रोग और उच्च रक्तचाप के रोगी नित्य तीन – रहें। आशातीत लाभ होगा। नेित्य तीन बार नींबू का पानी पीते रहें, मस्त

सन मात्रा में नींबू का रस और अदरक का रस (1-1 चम्मच) मिलाकर गर्म करके *ई वाली जगह पर लेप करें। नींबू और अदरक का रस काँच की बोतल में भरकर फ्रीज में रखने से खराब नहीं होता।

 

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