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पालक की वैज्ञानिक खेती कैसे करें? Palak Ki Kheti Kaise Karen?

paalak ki kheti kaise karenमित्रों मैं संदीप ओला हु और मैं एक किसान का बेटा हु और किसान का बेटा तो खेती से सम्न्धित जानकारी कैसे शेयर नहीं करेगा.

पालक की वैज्ञानिक तरीके से खेती कैसे करें? Palak ki vaigyanik kheti kaise karen

Agriculture of Spinach in Hindi

पालक (Palak Spinach)
सामान्य विवरण:- पालक या विलायती पालक, महत्वपूर्ण पत्तेदार सब्जी है। चीन देश में अति
प्राचीन काल में उगाई जाती है। पालक दो तरह की होती है: पालक ;ैचपदंबी ठममजद्ध या देशी पालक जो
लम्बी पत्तियों वाली गर्म मौसम में भी हो जाती है। पालक या विलयती पालक, ठण्डे मौसम में होती है। गर्मी
मंे शीघ्र ही फूलने लगती है जो अवांछनीय है। पालक में कैल्शियम विटामिन ‘ए’ अधिक मात्रा में तथा फाॅस्फोरस,
आयरन और विटामिन ‘सी’ मध्यम मात्रा में पाया जाता है। पत्तियाँ शीतल, रेचक, स्वास्थ्यवर्धक, शमनकारी,
सुपाच्य, कृमिनाशः रक्त शोधक, मस्तिष्क, पथरी (गुर्दे में), स्कैबीज, श्वेत कुष्ठ, पित्त दोष में लाभदायक;
वमनरोधी, कफकारक, ज्वरनाशक (आयुर्वेद)। बीज बोने के एक माह बाद काटने योग्य हो जाती है। कुल
4-6 कटाई प्राप्त होती है। प्रति हेक्टर 80-90 क्विंटल हरी पत्तियाँ प्राप्त होती है। इसे वर्ष पर्यन्त उगा सकते
है।
आवश्यकताएँ:
जलवायु, भूमि, सिंचाई – शरद ऋतु की सब्जी होते हुए भी मध्यम गर्म वातावरण में हो सकती
है। अधिक तापक्रम उचित नहीं होता है। उत्तम जल निकास वाली सभी प्रकार की भूमि में उगाई जा सकती
है। शीत ऋतु में 10-12 दिन के अन्तर से सिंचाई करनी चाहिए। पत्तीदार सब्जी होने के कारण अधिक जल
की आवश्यकता होती है।

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खाद एवं उर्वरक – पत्तेदार सब्जी होने के कारण अधिक नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है, अतः
300-400 क्विंटल गोबर की खाद तथा 100 किलो नाइट्रोजन प्रति हेक्टर की आवश्यकता होती है। गोबर
की खाद खेत की तैयारी के समय दें। नाइट्रोजन को 4 या 5 भागों में बांटकर प्रत्येक कटाई के बाद दिया
जाना उचित रहता है। उर्वरक फैलाकर दिया जा सकता है।
उद्यानिक क्रियाएँ:

पालक की खेती करने के बारे में जानकारी पाने के बाद सरसों की खेती जरुर पढ़ें  –

7.     सरसों की खेती : किस्में, रोग, जलवायु, खाद, सिंचाई
बीज विवरण – प्रति हेक्टर बीज की मात्रा 25-30 किलो
बीज बोना – समय – फरवरी-मार्च, सितम्बर-नवम्बर, जून-जुलाई
अन्तर-कतार-20 सेमी., पौधे 15 सेमी. या छिड़काव द्वारा।
बीज – 3-5 सेमी. गहरे बुवाई कर ऊपर से मिट्टी ढक देना चाहिए।
कटाई – पत्तियाँ जब पूर्ण विकसित हो जाएं तब काट लेना चाहिए। पत्तियाँ काटते समय यह
ध्यान रखें कि पौधों को हानि न पहुंचने पाएँ।

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One comment

  1. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति … शानदार पोस्ट …. Nice article with awesome depiction!! 🙂 🙂

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