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निर्देश का गुण

राजन और कमल दोनो भाई अपने परिवारों के साथ एक संयुक्त परिवार में रहते थे। हर पिता की तरह वे दोनो ही चाहते थे कि उनके बच्चे हर चीज में अव्वल रहें। लेकिन जाने क्या ऐसा था कि एक ही छत के नीचे रहने और एक ही तरह की सुख-सुविधाएं मिलने के बावजूद राजन का बेटा ज्यादा कुछ हासिल नहीं कर पाता था जबकि कमल का बेटा खुद को मिला कोई भी काम कहीं अधिक सहजता के साथ कर जाता था। राजन इस बात को लेकर दुखी रहता था और अक्सर वह अपने बेटे को सबके सामने ही कोसने लगता।

एक दिन उसके पिता ने उसे बुलाया और बोले, बेटा, अगर बच्चा कोई काम नहीं कर पा रहा तो इसमें सिर्फ उसकी कमी नहीं है। इसमें कमी तुम्हारे निर्देश के ढ़ंग में भी है।

राजन को बात समझ नहीं आई तो पिता आगे बोले- देखो, जब तुम अपने बेटे को कोई निर्देश देते हो तो तुम आदेश के भाव में कहते हो जाओ जाकर इसे पूरा करों। उसके मन को तुम्हारा यह आदेश भारी लगता है।

जबकि कमल अपने बेटे में कार्य के प्रति उत्सुकता पैदा करते हुए कहता है, तुम्हें इस काम में मजा आएगा, जरा करके तो देखो। और वह अपने पिता को सही साबित करता है। इसलिए अपने निर्देश में सकारात्मकता का भाव रखो। तुम्हारे बेटे को इससे खुद को साबित करने का प्रोत्साहन मिलेगा।

शिक्षा(Moral) : फ्रेंड्स इस Hindi motivational story से हमें प्रेरणा मिलती है कि हम सकारात्मक निर्देश से सामने वाले की प्रतिभा पर यकीन दिखाते हैं।

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