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प्रतिजैविक

प्रतिजैविक (Antibiotic)
सूक्ष्मजीवों द्वारा प्रतिजैविकों Antibioticका उत्पादन 20वीं शताब्दी की अत्यंत ही
महत्त्वपूर्ण खोज और मानव समाज के कल्याण के लिए एक बहुत बड़ी उपलधि  मानी
जाती है। ऐंटी एक ग्रीक भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ खिलाफ तथा बायो का अर्थ
जीवन है। दोनो को मिला देने से इसका अर्थ ‘जीवन के खिलाफ’ हुआ (रोग जो जीवों
से उत्पन्न होते हैं उनके संदर्भ में जबकि मनुष्यों के संदर्भ में यह जीवन के खिलाफ
न होकर जीवन के प्रति माने जाते हैं। प्रतिजैविक(Antibiotic) एक प्रकार के रसायनिक
पदार्थ हैं, जिनका निर्माण वुफछ सूक्ष्मजीवियों द्वारा होता है। यह अन्य (रोग उत्पन्न करने वाले) सूक्ष्मजीवियों की वृध्दि को मंद अथवा उन्हें मार सकते
हैं। आप सामान्य रूप से प्रयोग में लाए जाने वाले ऐंटीबायोटिक पैनीसीलिन से तो परिचित
ही हैं। क्या आप जानते हैं कि पैनीसीलिन सबसे पहला ऐंटीबायोटिक था, जिसकी खोज एक प्रकार का हादसा था?
एलैग्जैंडर फ्रलैमिंग
जब स्टैपिफलोकोकस बैक्टीरिया पर कार्य कर रहे थे तब उन्हें एक बार दिखाई दिया कि जिन
प्लेटों पर वह कार्य कर रहे थे, उनमें एक बिना धूली प्लेट पर मोल्ड उत्पन्न हो गए हैं जिस कारण
स्टैपिफलोकोकस वृध्दिन कर सका। उन्होंने पाया कि यह प्रभाव मोल्ड द्वारा उत्पन्न एक
रसायन ‘पैनीसिलीन’
द्वारा होता है। चूँकि
पैनीसिलीन, पैनीसीलियम नोटेटम नामक मोल्ड से उत्पन्न होता है। इस कारण इसका नाम उन्होंने ‘पैनीसिलीन’ रखा। यद्यपि बाद में अरनैस्ट
चैन तथा हावर्ड फ्रलौरे ने इसकी एक शक्तिशाली एवं प्रभावशाली ऐंटीबायोटिक के रूप में
पुष्टि की। इस ऐंटीबायोटिक का प्रयोग दूसरे विश्व यु( में घायल अमरीकन सिपाहियों के
उपचार में व्यापक रूप से किया गया। फ्रलैमिंग, चैन तथा फ्रलौरे को इस खोज के लिए
1945 में नोबल
पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। पैनीसिलिन के बाद अन्य सूक्ष्मजीवियों से अन्य ऐंटीबाॅयोटिकों
को भी परिशु( किया गया। क्या आप वुफछ अन्य प्रतिजैविकी Antibioticके नाम तथा उनके स्रोतों
के बारे में बता सकते हैं। प्लेग, काली खाँसी, डिप्थीरिया (गलघोंटू), लैप्रोसी (वुफष्ठरोग) जैसे भयानक रोग, जिनसेे संसार में लाखों लोग मरे हैं,
के उपचार के लिए ऐंटीबायोटिकों
ने हमारी क्षमता में वृध्दिकी एक शक्ति के रूप में आये हैं। आज हम ऐंटीबायोटिकों से
रहित संसार की कल्पना ही नहीं कर सकते हैं।

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