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जेम्स वाट्सन और फ्रांसिस क्रिक

जेम्स डीवे वाटसन का जन्म 6 अप्रैल, 1928 को शिकागो में हुआ था। वर्ष 1947 में इन्होंने प्राणी विज्ञान विषय में बी
एस सी की उपाधिग्रहण की। इन वर्षों के दौरान इनके बालकपन की रुचि पक्षियों को देखते
रहना थी। इसी रुचि ने इन्हें आनुवंशिकी के बारे में ज्ञान प्राप्त करने की प्रबल इच्छा
जागृत कर दी। यह तभी संभव हो सका जब इन्हें ब्लूमइंगटन में इंडियाना विश्वविद्यालय
ने प्राणि विज्ञान में स्नातक अध्ययन के लिए फैलोशिप दी। इसी विश्वविद्यालय से ही इन्हें
‘जीवाणुभोजी बहुगुणन पर कठोर एक्स-रे
का प्रभाव’ पर कार्य करने के फलस्वरूप
प्राणि विज्ञान में पी एच डी की उपाधिप्रदान की गई। वह क्रिक से मिले तथा डी एन ए संरचना
की गुत्थी को सुलझाने में सर्वप्रथम दोनों की जो सामान्य रुचियाँ थी, उन्हें खोज निकाला। इनका पहला गंभीर प्रयास असंतोषजनक
सिद्ध हुआ। इनका दूसरा प्रयास प्रायोगिक प्रमाणों पर अध्कि आधरित था तथा न्यूक्लिक
एसिड साहित्य का भली प्रकार से सम्मान प्राप्त हुआ परिणामस्वरूप मार्च, 1953 को पूरक डबल हैलम्स संरूपण का प्रस्ताव सामने आया।
फाँसिस हैरी कोम्पटोन क्रिक का जन्म इंग्लैंड के नार्थ ऐम्पटान में 8 जून, 1916 में हुआ था। इन्होंने लंदन के यूनीवर्सिटी कोलेज
में भौतिकी का अध्ययन किया और वर्ष 1937 में बी एस सी की उपाधिग्रहण की। वर्ष 1954
में इन्होंने पी एच डी का कार्य समाप्त किया इनकी थीसिस का शीर्षक ‘66 पालीपैप्टाइडों तथा प्रोटीन पर एक्स-रे विर्वतन’ था। क्रिक्स के जीवन काल में यदि किसी प्रकार का क्रातिक
प्रभाव उनपर पड़ा तो वह जे डी वाटसन से उनकी मित्राता का था। इस जवान वाटसन जिसकी आयु
23 वर्ष की थीऋ ने वर्ष 1953 में डी एन ए तथा प्रतिकृति योजना के लिए डबल हैलीकल संरचना
का प्रस्ताव प्रस्तुत कर दिया। क्रिक को वर्ष 1959 में एफ आर एस से सुशोभित किया गया।
वाटसन तथा क्रिक के सम्मान में वर्ष 1959 के मैस्साचूसैट्स जनरल होस्पिटल का जोन कोलिन
वैरैन पुरस्कार तथा वर्ष 1960 का लैस्कर पुरस्कार और 1962 का अनुसंधन कोर्पोरेशन पुरस्कार
भी शामिल है।

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