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ऐसी बानी बोलिए

ऐसी बानी
बोलिए
शब्दों की महिमा निराली
है, वे बनाने व बिगाड़ने दोनों कि शक्ति रखते हैं। निर्भर आप पर करता है कि आप उनका
प्रयोग कैसे करते हैं?
अगर शब्दों की ताकत
के बारे में बात करे तो –
द्रोपदी द्वारा दुर्योधन के लिए “अंधे
का पुत्र अँधा” कहना महाभारत का
कारण बना और अच्छे की बात करे तो प्राण त्यागते व्यक्ति को गीता-वचन सुनाकर साहस
देने की कोशिश की जाती है। शब्द संबंध बना सकते है, बिगाड़ सकते है यहाँ तक की
गर्भस्थ शिशु पर भी शब्दों का प्रभाव देखा गया है। पर इतने शक्तिशाली अस्त्र के
प्रयोग के प्रति हम इतने लापरवाह क्यों है?
ऐसा
क्यों?
भगवान ने हमें दो
आखें, दो कान, बत्तीस दात दिए है लेकिन जीभ एक ही देना उचित समझा क्यों? क्योंकि
हम इसका मूल्य समझे और इसके उपयोग में सावधानी बरते। जब हम छोटे थे तो हमें शिक्षक
रटाते थे “पहले सोचो फिर बोलो” पर क्या हम याद रख पाते है –
‘ऐसी बानी बोलिए,
मन का आपा खोय,
औरन को सीतल करे,
आपहु सीतल होय।
अद्श्य
शब्द साक्षात असर –

एक बहुत ही भला राजा
था वह अपनी प्रजा व परिवार से बहुत प्यार करता था एक दिन एक ज्योतिषी ने राजा को
बताया कि आपके परिवार व नगर के लोग एक-एक करके आपके आखों के सामने मर जाएगे। राजा
ने ज्योतिषी को जेल में डलवा दिया। कुछ दिनों बाद एक अन्य ज्योतिषी राजा के पास
पंहुचा और उसने कहा की आप राज्य के सबसे लम्बी उम्र वाले आदमी होगे। राजा ने उस
ज्योतिषी को इनाम दिया। एक ही बात को कहने के कई तरीके है, एक तरीके से बुरा लग
सकता है   तो दुसरे तरीके से मन को
उत्साहित किया जा सकता है ये आप पर निर्भर करता है कि आप कौन से तरीके को चुनते
हैं। कुछ तो जन्मजात होता है और कुछ बनाना पड़ता है।
ऐसे
बताये दुसरे की गलती-
अगर आपको सामने वाले
में गलती दिख रही है तो आप उसे सीधे बताने की गलती न करे क्योंकि 90% वो गलत समझेगा और वह गलती स्वीकार करने के
बजाय दलीले देने की कोशिश करता है व आपसे बदला लेने की भावना पैदा कर लेता है
इसलिए किसी की गलती बताने से पहले उसकी तारीफ करे। जैसे तुम्हारी बातों में सच्चाई
होती है किन्तु जब तुम बात करते हो ऐसा लगता लड़ रहे हो।
तोल
मोल कर बोल
जीवन की जटिल रह में
शब्द धुप का काम भी करते है और छांह का भी। सही समय पर सही शब्द प्रयोग कर के आप
अपनी ही नहीं, दूसरो की राह आसान और खुशगवार बना सकते है।
शिक्षक के मुह से
निखलने वाले शब्द ज्ञान का भंडार बन जाते है, और गायक के शब्द सुरों की झंकार बन
जाते है, कथाकार की लेखनी से निखले शब्द मर्मस्पर्शी कहानियां बनते है और अबोध
बालक के तोतले शब्द माँ के लिए पुलक बन जाते है। शब्द कई विकट शब्दों को जन्म देते
है, पर कमाल की बात है कि कई गंभीर मसलों को हल भी ये शब्द ही करते है।
हड़बड़ी
में गड़बड़ी-
जुवां से शब्दों का
निकला, कमान से तीर के छुटने की तरह है, दोनों ही कार्यो को करते समय सावधानी
अनिवार्य है। पति ने जल्दी आने का वादा किया था, पर देर हो गयी। गुस्से में तमतमाई
पत्नी ने हड़बड़ी में कह दिया, ‘मुझे
अपनी माँ कि तरह मत समझना, जो रात के २ बजे तक पिताजी का इंतजार करती रहती है’ थके-हारे पति इस वर से सह नहीं पाए और दोनों
में अनबन हो गयी।
परनिंदा
से बचें-
हमारे द्वारा
उच्चारित शब्दों का प्रभाव हमारे और सुनने वालो पर प्रभाव बोतल में बंद गंध के
प्रभाव कि तरह होता है। इत्र की बोतल खोलते ही माहोल खुशनुमा हो जाता है जबकि
अमोनिया कि बोतल खोलते ही जी कसैला हो जाता है अन्य के लिए प्रयोग किये  अपशब्द न सिर्फ दूसरो पर बल्कि स्वय अपने ऊपर
भी नकारात्मक प्रभाव डालते है प्रयोग    

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